रूस में ईंधन संकट: पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और आर्थिक प्रभाव
POLITICAL
6/29/20261 min read


संकट के समय भारत को कच्चा तेल देने वाले रूस में अब ईंधन संकट, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें
Russia Fuel Supply Shortage 2026: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर अब सीधे रूस के घरेलू बाजार और ऊर्जा व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की भारी कमी हो गई है। हालात ऐसे हैं कि कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं और आम लोगों के साथ-साथ कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं।
यूक्रेनी ड्रोन हमलों से बढ़ा संकट
राष्ट्रपति पुतिन ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में कहा कि यूक्रेन द्वारा रूसी तेल कुओं, रिफाइनरियों और अन्य ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लगातार किए जा रहे ड्रोन हमलों के कारण ईंधन उत्पादन और आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर देशभर में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पर पड़ा है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऊर्जा अवसंरचना पर हो रहे हमलों के प्रभाव को कम करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि आम नागरिकों और उद्योगों को राहत मिल सके।
पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें
रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन ने बैठक में कहा कि देश के कई इलाकों में वाहन चालकों और व्यवसायों को अब भी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने के लिए घंटों तक लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
डीजल निर्यात पर लग सकता है पूर्ण प्रतिबंध
घरेलू मांग को पूरा करने के लिए रूस फिलहाल अपने 1.7 मिलियन मीट्रिक टन गैसोलीन रिजर्व का उपयोग कर रहा है। सरकार अब डीजल के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है, ताकि देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि, इससे पहले रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा था कि डीजल निर्यात पर तत्काल प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार अब सख्त फैसले लेने की तैयारी में है।
कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता
राष्ट्रपति पुतिन ने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र को निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आगामी फसल की कटाई और कृषि कार्यों के लिए समय पर ईंधन उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
देशभर में ईंधन वितरण और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स 24 घंटे काम कर रही है, ताकि आवश्यक क्षेत्रों में आपूर्ति बाधित न हो।
भारत के लिए भी अहम है यह स्थिति
गौरतलब है कि वैश्विक प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद रूस ने भारत को बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रखी थी। ऐसे में रूस के भीतर पैदा हुआ यह ईंधन संकट अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और तेल निर्यात पर भी असर डाल सकता है। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका प्रभाव वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर भी देखने को मिल सकता है।
