कमजोर मानसून का भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला प्रभाव
6/23/20261 min read


कमजोर मानसून से महंगाई में वृद्धि
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने हालिया जून बुलेटिन में गंभीर चेतावनी दी है कि कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की आर्थिक वृद्धि और महंगाई को प्रभावित कर सकता है। इस वर्ष, देश में मानसून का प्रभाव पहले से ही महसूस किया जा रहा है, जो कृषि और संबंधित क्षेत्रों में सक्रियता को बाधित कर सकता है। यदि मानसून कमज़ोर रहता है, तो खाद्य उत्पादन में कमी आ सकती है, जिसके परिणामस्वरूप महंगाई दर में वृद्धि होने की आशंका है।
भौगोलिक तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था
RBI ने वैश्विक भौगोलिक तनावों का उल्लेख करते हुए कहा है कि ये भारत की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। अमेरिकी-ईरानी संबंधों की स्थिति, जो किसी भी समय बिगड़ सकती है, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है। यदि समझौता टूटता है, तो इससे ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता आ सकती है, जो महंगाई को बढ़ा सकती है। इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि कमजोर मानसून के साथ ही विश्व स्तर पर घटनाक्रम भी हमारी आर्थिक वृद्धि पर भारी पड़ सकते हैं।
स्थिर आर्थिक संकेतक
हालांकि, RBI का यह भी कहना है कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। यह वृद्धि मुख्य रूप से निजी उपभोग और स्थिर पूंजी निवेश के चलते हुई है। हालांकि, मई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में थोड़ी वृद्धि का आभास हुआ है, परन्तु इसके बावजूद RBI का मानना है कि महंगाई पूरी तरह से नियंत्रण में है।
भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार के चलते बाह्य क्षेत्र की स्थिति भी संतोषजनक है। RBI का यह विश्वास है कि भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अन्य देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।
हालांकि, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यदि मानसून की स्थिति बेहतर नहीं होती है, तो यह विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, यह आवश्यक है कि हम इन सभी संकेतों पर ध्यान दें और उनकी पुष्टि के लिए प्रतिक्रिया विकसित करें, जिससे आर्थिक वृद्धि को बनाए रखा जा सके।
