
China Science News: प्लास्टिक कचरे के बढ़ते संकट और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में चीन के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने एक ऐसी नई रासायनिक तकनीक विकसित करने का दावा किया है, जिसकी मदद से कठिन प्लास्टिक कचरे को सीधे विमान में इस्तेमाल होने वाले जेट ईंधन (Aviation Fuel) में बदला जा सकता है। प्रयोगशाला परीक्षणों में इस प्रक्रिया से 82.3 प्रतिशत तक तरल ईंधन (Liquid Yield) प्राप्त करने में सफलता मिली है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
वैज्ञानिकों के अनुसार, प्लास्टिक और जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) दोनों मुख्य रूप से कार्बन और हाइड्रोजन से बने होते हैं।
नई तकनीक में प्लास्टिक के लंबे और मजबूत पॉलीमर अणुओं को विशेष रासायनिक प्रक्रिया और नियंत्रित तापमान के माध्यम से छोटे-छोटे हाइड्रोकार्बन अणुओं में बदला जाता है, जिन्हें विमान के ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
कोबाल्ट और निकेल आधारित विशेष कैटेलिस्ट
इस शोध की सबसे बड़ी विशेषता कोबाल्ट और निकेल आधारित विशेष कैटेलिस्ट है।
पारंपरिक तकनीकों में प्लास्टिक के अणु किनारों से टूटते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में मीथेन जैसी गैसें बनती हैं और तरल ईंधन कम प्राप्त होता है।
नई तकनीक में कैटेलिस्ट प्लास्टिक की श्रृंखला को बीच से नियंत्रित तरीके से तोड़ता है, जिससे C8 से C16 हाइड्रोकार्बन (Alkanes) अधिक मात्रा में प्राप्त होते हैं। यही यौगिक विमान के जेट ईंधन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
79 प्रतिशत चयन क्षमता
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रक्रिया में 79 प्रतिशत चयन क्षमता (Selectivity) के साथ विमान में उपयोग योग्य मध्यम आकार के तरल हाइड्रोकार्बन प्राप्त हुए। इससे गैस बनने की मात्रा कम हो जाती है और उपयोगी ईंधन का उत्पादन बढ़ जाता है।
कम लागत और पर्यावरण के लिए लाभदायक
इस तकनीक की एक बड़ी विशेषता यह है कि यह सामान्य तापमान और अपेक्षाकृत हल्की परिस्थितियों (Mild Conditions) में काम करती है। इससे ऊर्जा की खपत कम होती है और उत्पादन लागत भी घट सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में यह तकनीक औद्योगिक स्तर पर सफल साबित होती है, तो इससे प्लास्टिक कचरे के निपटान और टिकाऊ विमानन ईंधन (Sustainable Aviation Fuel) के उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।
