‘कट मनी’ और वसूली के आरोपों से घिरी भाजपा सरकार, 22 पदाधिकारियों पर गिरी गाज

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार को अब अपने ही नेताओं पर लगे ‘कट मनी’ और अवैध वसूली के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार बनने के तीन महीने भी पूरे नहीं हुए हैं कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार, गुटबाजी और अनुशासनहीनता के मामलों ने संगठन की चिंता बढ़ा दी है।

22 पदाधिकारियों को किया गया निलंबित

पार्टी नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संगठनात्मक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की है। भाजपा ने 22 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जिनमें कई मंडल अध्यक्ष भी शामिल हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, कोलकाता और आसपास के जिलों से अवैध वसूली और अनुशासनहीनता की कई शिकायतें मिलने के बाद 250 से अधिक नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। संतोषजनक जवाब नहीं देने वाले 22 पदाधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

प्रदेश अध्यक्ष ने दी कड़ी चेतावनी

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने भी पार्टी के नाम पर हो रही कथित अवैध वसूली की शिकायतों को गंभीर माना है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए संबंधित नेताओं को सुधार के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है।

उन्होंने कहा कि पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी नेता या कार्यकर्ता को बख्शा नहीं जाएगा और भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति

राज्य सरकार ने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने की बात दोहराई है। आम नागरिकों से अवैध वसूली या भ्रष्टाचार की शिकायत सीधे दर्ज कराने के लिए चार विशेष टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं, ताकि शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार और संगठन दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने और जनता का विश्वास कायम रखने की होगी।