
Gujarat Kidney Disease: गुजरात में किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों की संख्या में सिर्फ दो वर्षों में 34% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में जहां 818 किडनी ट्रांसप्लांट हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,099 हो गई। चिंता की बात यह भी है कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर का इंतजार करते हुए पिछले पांच वर्षों में 16 मरीजों की मौत हुई है।
किडनी डोनर का इंतजार करते हुए पांच साल में 16 मरीजों की मौत
अहमदाबाद की सिविल अस्पताल स्थित किडनी अस्पताल में वर्ष 2016 में 341 किडनी ट्रांसप्लांट किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 500 हो गई। वर्ष 2025 में हुए 500 ट्रांसप्लांट में 330 मरीज गुजरात के और 170 मरीज गुजरात के बाहर के थे। इनमें 157 ट्रांसप्लांट कैडेवर डोनेशन और 49 स्वैप ट्रांसप्लांट के जरिए किए गए।
छुट्टियों को छोड़ दें तो अस्पताल में प्रतिदिन औसतन दो से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं। गुजरात डायलिसिस प्रोग्राम के तहत वर्ष 2025 में 5.61 लाख मरीजों का डायलिसिस किया गया। यानी प्रतिदिन औसतन करीब 1,538 मरीजों को डायलिसिस की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
कम उम्र में भी बढ़ रही किडनी की समस्या
विशेषज्ञों और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कम उम्र के लोगों में भी किडनी से जुड़ी समस्याएं चिंता का विषय बन रही हैं। वर्ष 2025 में सबसे अधिक किडनी ट्रांसप्लांट वाले राज्यों में दिल्ली 2,458 ट्रांसप्लांट के साथ पहले, तमिलनाडु 1,909 के साथ दूसरे और महाराष्ट्र 1,475 के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
किडनी डोनर का इंतजार करते हुए वर्ष 2025 में दिल्ली में सबसे अधिक 132 मरीजों की मौत हुई। इसके अलावा राजस्थान में 19, गोवा में 17, महाराष्ट्र में 15, मध्य प्रदेश में 11 तथा कर्नाटक और हरियाणा में 10-10 मरीजों की मौत दर्ज की गई।
किडनी की बीमारी बढ़ने के प्रमुख कारण
किडनी की बीमारी के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर: लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज और ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- खान-पान की आदतें: अधिक नमक, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड तथा फास्ट फूड का अधिक सेवन जोखिम बढ़ा सकता है।
- कम पानी पीना: पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने की आदत भी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
- व्यायाम की कमी: शारीरिक गतिविधि की कमी से मोटापा, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
- दवाओं का अनियंत्रित इस्तेमाल: दर्द निवारक दवाओं समेत कुछ दवाओं का लंबे समय तक या बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
- पानी की गुणवत्ता: कुछ क्षेत्रों में पानी में फ्लोराइड, नाइट्रेट या अन्य रासायनिक तत्वों की अधिक मात्रा भी चिंता का विषय हो सकती है।
- जागरूकता और जांच में वृद्धि: अब पहले की तुलना में अधिक लोग स्वास्थ्य जांच करा रहे हैं, जिससे किडनी की बीमारियों की पहचान भी अधिक हो रही है।
हालांकि, किडनी की बीमारी के बढ़ते मामलों के पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, जीवनशैली, दवाओं का उपयोग, आनुवंशिक कारण और समय पर बीमारी की पहचान जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभा सकते हैं।



