छोटा उदयपुर: 1.19 करोड़ की नहर में पानी छोड़ने से पहले ही पड़ी दरारें, किसानों में भारी नाराजगी

Chhota Udepur News: गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के नसवाड़ी तहसील के लिंडा गांव में किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के लिए 1.19 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई नहर विवादों में घिर गई है। करीब 3.50 किलोमीटर लंबी इस नहर में पानी छोड़े जाने से पहले ही कई स्थानों पर दरारें पड़ गई हैं, जबकि कुछ हिस्सों में नहर पूरी तरह टूटकर क्षतिग्रस्त हो गई है। मामले को लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच ने सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की है।

पानी छोड़े बिना ही खुली निर्माण कार्य की पोल

स्थानीय आदिवासी क्षेत्र के किसानों और आसपास के गांवों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी। नहर निर्माण का कार्य बोडेली की वीरकृपा एजेंसी को सौंपा गया था, जबकि इसकी निगरानी छोटा उदयपुर जिला पंचायत के सिंचाई विभाग को करनी थी।

हालांकि, लिंडा तालाब से अब तक एक बार भी किसानों को पानी नहीं छोड़ा गया, लेकिन उससे पहले ही तालाब के पास नहर में दरारें और टूट-फूट सामने आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत का आरोप

स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि बिना पानी छोड़े ही नहर टूटने लगी है, तो पानी भरने के बाद इसकी स्थिति और भी खराब हो सकती है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने निर्माण कार्य की उचित निगरानी नहीं की, जिसके कारण ठेकेदार ने घटिया गुणवत्ता का निर्माण किया।

किसानों का कहना है कि सरकार ने आदिवासी क्षेत्र के विकास और सिंचाई सुविधा के लिए करोड़ों रुपये की राशि मंजूर की थी, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदार की कथित मिलीभगत के कारण परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं हो सकी। वर्षों से सिंचाई के पानी की उम्मीद लगाए बैठे किसानों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है।