मोरबी में किसानों का सत्याग्रह पार्ट-3 शुरू, बिजली लाइन मुआवजा नीति के विरोध में निकाली विशाल पदयात्रा

Morbi Farmers Protest: गुजरात के मोरबी जिले के जेतपर गांव में बिजली ट्रांसमिशन लाइन मुआवजे को लेकर चल रहे आंदोलन का तीसरा चरण (सत्याग्रह पार्ट-3) शुरू हो गया है। राज्य सरकार के नए मुआवजा परिपत्र के विरोध में हजारों किसानों और महिलाओं ने मोरबी में विशाल पदयात्रा निकाली और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नियमों में संशोधन की मांग की।

नए परिपत्र के विरोध में किसानों का प्रदर्शन

गुजरात सरकार के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग द्वारा जारी नए परिपत्र को किसान हितों के खिलाफ बताते हुए जेतपर आंदोलन के तहत सत्याग्रह का तीसरा चरण शुरू किया गया। आंदोलन में राज्य के 365 गांवों की ग्राम पंचायतों के समर्थन पत्र के साथ किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए परिपत्र में संशोधन की मांग की।

हजारों किसान और महिलाएं पदयात्रा में शामिल

गुजरात किसान छावनी जेतपर (मच्छू) के नेतृत्व में निकली यह पदयात्रा महेंद्रनगर चौकड़ी से शुरू हुई। किसानों ने अन्याय के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शहर के विभिन्न मार्गों से मार्च किया और अंत में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

कलेक्टर ने क्या कहा?

मोरबी जिला कलेक्टर ने बताया कि किसानों की मांग के अनुसार मार्केट रेट कमेटी का गठन कर उसमें किसान प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। सरकार ने मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी करते हुए शहरी क्षेत्रों में 200 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे का प्रावधान किया है। जिन किसानों को पहले मुआवजा मिल चुका है, उन्हें भी अतिरिक्त भुगतान दिया जाएगा।

कलेक्टर ने कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार मार्केट रेट कमेटी द्वारा दर तय होने के बाद ही बिजली के खंभे लगाने का कार्य शुरू होगा। संबंधित कंपनी को वैल्यूअर नियुक्त करने के निर्देश दिए जा चुके हैं और किसानों को 100 प्रतिशत मुआवजा मिलने के बाद ही परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा।

टेलीग्राफ एक्ट की धारा 10(डी) के तहत पूरी भरपाई की मांग

किसानों ने ज्ञापन में मांग की है कि 4 जुलाई 2026 को जारी ऊर्जा विभाग के परिपत्र में संशोधन किया जाए। उनका कहना है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 और टेलीग्राफ एक्ट 1885 की धारा 10(डी) के अनुसार किसानों को भूमि और फसलों के नुकसान का पूरा मुआवजा मिलना चाहिए। जब तक नियमों में आवश्यक संशोधन नहीं किए जाते, तब तक इस परिपत्र के अमल पर रोक लगाई जाए।