
Gold and Silver Price: मंगलवार को वायदा बाजार यानी MCX पर शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में करीब 1% तक की गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अब वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मंगलवार को सोने और चांदी पर दबाव रहा।
MCX पर सोने-चांदी की कीमतों का हाल
सोना (GOLD 05-Oct-26 MCX): सोने का पिछला बंद भाव ₹1,55,940 प्रति 10 ग्राम था। मंगलवार को यह गिरावट के साथ ₹1,55,351 पर खुला। कारोबार के दौरान सोने में ₹850 यानी 0.55% की गिरावट दर्ज की गई और कीमत ₹1,55,090 के स्तर तक पहुंच गई।
चांदी (SILVER 04-Sep-26 MCX): चांदी का पिछला बंद भाव ₹2,38,048 प्रति किलोग्राम था। मंगलवार को यह गिरकर ₹2,35,717 पर खुली। कारोबार के दौरान चांदी में ₹2,354 यानी 0.99% की गिरावट आई और भाव ₹2,35,694 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मंगलवार को स्पॉट गोल्ड करीब 0.5% नीचे था, जबकि चांदी में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई।
सोने-चांदी में गिरावट की बड़ी वजह क्या है?
कीमती धातुओं पर दबाव के पीछे इस समय कई वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण काम कर रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान वार्ता के पटरी से उतरने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। मंगलवार को Brent crude $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया। महंगा कच्चा तेल वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाता है।
ब्याज दरों को लेकर चिंता
तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। ऐसे माहौल में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बाजार में अनिश्चितता बढ़ जाती है।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी भी सोने पर दबाव डाल रही है। चूंकि सोना कोई नियमित ब्याज या यील्ड नहीं देता, इसलिए ब्याज दर और बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए बुलियन की आकर्षकता कम हो सकती है।
निवेशकों की ओर से प्रॉफिट बुकिंग
हाल की तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली यानी Profit Booking भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की एक प्रमुख वजह बनी हुई है। इससे पहले भी तेज बढ़त के बाद दोनों कीमती धातुओं में बिकवाली देखने को मिली थी।
सोना आमतौर पर महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के खिलाफ हेजिंग एसेट माना जाता है, लेकिन जब बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ती है, तो गैर-यील्डिंग एसेट के रूप में सोने पर दबाव बढ़ सकता है।



