सूरत में किम नदी की बाढ़ से किसानों पर टूटा कहर, फसलें तबाह, उचित मुआवजे की मांग

Surat News: सूरत जिले में किम नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे अधिक नुकसान ओलपाड और मांगरोल तहसील के कई गांवों में हुआ है, जहां किसानों की खड़ी फसलें, सब्जियों के मंडप और कृषि भूमि बाढ़ के पानी में बर्बाद हो गई हैं। मांगरोल तहसील के रणकपोर गांव के किसान भारी आर्थिक और मानसिक संकट का सामना कर रहे हैं।

खड़ी फसलें और सब्जियों के मंडप बाढ़ में बहे

किम नदी में आई बाढ़ के कारण ओलपाड और मांगरोल के कई गांवों में भारी तबाही मची। कई घरों में पानी घुसने से घरेलू सामान और जरूरी वस्तुएं नष्ट हो गईं। सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और सामान्य जनजीवन लंबे समय तक प्रभावित रहा।

सबसे गंभीर असर किसानों पर पड़ा है। रणकपोर गांव में सब्जियों और गन्ने की खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई, जबकि सब्जियों के मंडप तेज बहाव में बह गए। किसानों की महीनों की मेहनत और लाखों रुपये का निवेश कुछ ही घंटों में पानी में बह गया।

कृषि भूमि भी हुई प्रभावित

बाढ़ का असर केवल फसलों तक सीमित नहीं रहा। उपजाऊ कृषि भूमि पर बड़ी मात्रा में कीचड़, रेत और प्लास्टिक का कचरा जमा हो गया है। किसानों का कहना है कि अब खेतों को दोबारा खेती योग्य बनाने के लिए काफी समय, मेहनत और अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।

इसका असर केवल मौजूदा सीजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी फसलों के उत्पादन पर भी पड़ेगा।

कर्ज और बढ़ी किसानों की चिंता

महंगाई, कृषि ऋण और प्राकृतिक आपदा ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिन फसलों की बिक्री से परिवार का खर्च चलना था, वही फसलें बाढ़ में नष्ट हो गईं। प्रभावित किसानों का कहना है कि यदि समय पर आर्थिक सहायता नहीं मिली तो दोबारा खेती शुरू करना बेहद कठिन हो जाएगा।

सरकार से उचित मुआवजे की मांग

प्रभावित किसानों ने सरकार से मांग की है कि केवल औपचारिक मुआवजा देने के बजाय मौके पर सर्वे कर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए और उसी आधार पर उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि त्वरित राहत और पुनर्वास के बिना हजारों परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।