
Crude Oil Price News: अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मध्य पूर्व में कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 4.5% गिरकर 79.96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। लंबे समय बाद ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर के नीचे पहुंचा है। बाजार में यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर संभावित समाधान की अटकलों के बीच आई है।
अमेरिका का दावा- जल्द हो सकता है समझौता
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर आज या कल कोई महत्वपूर्ण घोषणा हो सकती है।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और यह समझौते के लिए “आखिरी मौका” हो सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कतर, ओमान और पाकिस्तान इस मुद्दे पर मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं।
ईरान ने अमेरिकी दावे से किया इनकार
अमेरिकी दावों के विपरीत, ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ किसी नई प्रत्यक्ष वार्ता की शुरुआत नहीं हुई है।
हालांकि, ईरान ने पुष्टि की है कि ओमान के साथ हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक अस्थायी शिपिंग कॉरिडोर को लेकर बातचीत जारी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, फिलहाल प्राथमिकता व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
रिपोर्टों के अनुसार, जहाजों पर संभावित शुल्क (टोल) को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं।
क्यों अहम है हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य?
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात संघर्ष शुरू होने से पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। वैश्विक तेल भंडार में भी पिछले दो सप्ताह के दौरान प्रतिदिन लगभग 63 लाख बैरल की कमी दर्ज की गई है।
आगे क्या रह सकता है रुख?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक समझौता हो जाता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी आ सकती है। वहीं, यदि बातचीत विफल रहती है या क्षेत्र में फिर से सैन्य तनाव बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड दोबारा 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच सकता है।
भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट राहत भरी मानी जाती है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है, हालांकि खुदरा कीमतें तेल कंपनियों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेंगी।



