
Virendra Singh Baisoya Deported: दुबई से भारत लाया गया वीरेंद्र सिंह बैंसोया कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार है। उसकी गिरफ्तारी को भारत के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, क्योंकि उसके तार करीब ₹6,000 करोड़ के कथित ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं।
NCB के अनुसार, बैंसोया पर मेफेड्रोन की बड़ी खेप विदेश भेजने की साजिश में शामिल होने का आरोप है। उसके खिलाफ पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। भारत सरकार के प्रयासों के बाद उसे दुबई से डिपोर्ट कर एयर इंडिया की फ्लाइट के जरिए भारत लाया गया।
970 किलो मेफेड्रोन जब्त, लंदन भेजने की थी तैयारी
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस ड्रग्स तस्करी मामले में पुणे पुलिस ने 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई करते हुए दिवेश भूता और संदीप कुमार बैंसोया को गिरफ्तार किया था।
आरोपियों के कब्जे से करीब 970 किलो मेफेड्रोन बरामद किया गया था। जांच में दावा किया गया कि इस ड्रग्स की खेप को ‘डेल्टा लॉजिस्टिक्स’ के जरिए लंदन भेजने की तैयारी थी।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क वीरेंद्र सिंह बैंसोया के निर्देश पर संचालित किया जा रहा था।
लॉजिस्टिक्स कंपनी भी जांच के घेरे में
इस मामले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स के मालिक संदीप यादव और मैनेजर देवेंद्र यादव को भी गिरफ्तार किया गया है।
जांच के मुताबिक, नेटवर्क कथित तौर पर भारत से विदेशों तक मेफेड्रोन पहुंचाने के लिए लॉजिस्टिक्स और कंसाइनमेंट चैनल का इस्तेमाल करता था।
रेड कॉर्नर नोटिस के बाद दुबई में बैंसोया को हिरासत में लिया गया और अब भारत लाए जाने के बाद जांच एजेंसियां उससे कथित अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और नेटवर्क से जुड़े लोगों को लेकर पूछताछ करेंगी।
पाकिस्तान भागे संदीप धुनिया से भी कनेक्शन
वीरेंद्र बैंसोया का नाम दिल्ली पुलिस के करीब ₹13,000 करोड़ के कथित ड्रग्स मामले के मुख्य आरोपी संदीप धुनिया से भी जोड़ा गया है।
बैंसोया को धुनिया का करीबी सहयोगी बताया जाता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, संदीप धुनिया दुबई से पाकिस्तान भागने में सफल रहा था। ऐसे में बैंसोया की गिरफ्तारी से कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क की कड़ियों का पता लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बेटे ऋषभ के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस
जांच एजेंसियों के रडार पर वीरेंद्र बैंसोया का बेटा ऋषभ भी है। उसके खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की बात सामने आई है और उसके विदेश में होने का दावा किया जा रहा है।
अब जांच एजेंसियों का फोकस केवल 970 किलो मेफेड्रोन की खेप तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन, वित्तीय नेटवर्क और विदेशों में मौजूद सहयोगियों तक पहुंचने पर भी है।



