
Gujarat Government Employees Fixed Pay Policy: गुजरात सरकार की 5 वर्ष की फिक्स पे (Fixed Pay) नीति के खिलाफ राज्य के सरकारी कर्मचारियों ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकारी कर्मचारी मनोज दातला ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को ईमेल भेजकर पिछले 14 वर्षों से लंबित स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) की जल्द अंतिम सुनवाई कराने की मांग की है।
14 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला
याचिकाकर्ता ने अपने पत्र में बताया कि वे गुजरात लोक सेवा आयोग (GPSC), गुजरात अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (GSSSB) और अन्य सरकारी भर्ती एजेंसियों के माध्यम से नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत 5 वर्ष की फिक्स पे नीति पर नियुक्त हुए कर्मचारी हैं।
उन्होंने बताया कि यह अनुरोध SLP (Civil) No. 14124-14125/2012 के संदर्भ में किया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष लंबित है।
विशेष पीठ बनने से बढ़ी उम्मीद
याचिका में कहा गया है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने वर्षों से लंबित सिविल और आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष पीठ (Special Bench) का गठन किया है। इससे लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हजारों लोगों में नई उम्मीद जगी है।
कर्मचारियों ने मांग की है कि उनके मामले को भी उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर जल्द अंतिम सुनवाई की जाए।
हजारों कर्मचारियों के भविष्य का सवाल
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर सरकारी सेवा में आए हजारों कर्मचारियों के भविष्य और आजीविका से जुड़ा गंभीर मामला है।
उन्होंने बताया कि गुजरात हाईकोर्ट इस मामले में पहले ही सभी संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तृत फैसला दे चुका है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट में मामला पिछले 14 वर्षों से लंबित है, जिसके कारण कर्मचारी अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
कर्मचारियों को उम्मीद है कि विशेष पीठ के गठन के बाद इस पुराने मामले की भी जल्द सुनवाई होगी और उन्हें न्याय मिलेगा।



