गिर में शेरों के आवास पर माइनिंग का साया! अल्ट्राटेक को मंजूरी मिलने से नया विवाद

Mining Row Erupts in Gir: गुजरात के गिर वन क्षेत्र में शेरों के प्राकृतिक आवास और वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमरेली जिले के राजुला-जाफराबाद क्षेत्र स्थित बाबरकोट गांव की आरक्षित वन भूमि पर अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड को खनन (माइनिंग) की अनुमति देने संबंधी वन विभाग की सकारात्मक सिफारिश पर पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

जिस क्षेत्र को 2016 में संवेदनशील मानकर खारिज किया गया था, अब वहीं माइनिंग की सिफारिश

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में तत्कालीन डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DCF), गिर पूर्व वन प्रभाग, धारी ने बाबरकोट गांव के सर्वे नंबर 69/पैकी और 366/पैकी की लगभग 75.94 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि अल्ट्राटेक सीमेंट को देने से स्पष्ट इनकार कर दिया था।

तत्कालीन रिपोर्ट में कहा गया था कि यह क्षेत्र एशियाई शेरों का स्थायी आवास, प्रजनन क्षेत्र और महत्वपूर्ण लायन कॉरिडोर है। साथ ही गुजरात हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका (PIL) का हवाला देते हुए पर्यावरण को गंभीर नुकसान की आशंका जताई गई थी।

अब उसी क्षेत्र के लिए सकारात्मक रिपोर्ट

विवाद इसलिए गहराया है क्योंकि वर्तमान वन अधिकारी ने इसी क्षेत्र को माइनिंग के लिए उपयुक्त बताते हुए सकारात्मक अभिमत दिया है।

पुरानी रिपोर्ट में इस इलाके में 6 शेरों के स्थायी निवास तथा 15 से 20 शेरों की नियमित आवाजाही का उल्लेख था। इसके अलावा तेंदुआ, लकड़बग्घा और अजगर जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी भी दर्ज की गई थी।

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि पिछले दस वर्षों में इस क्षेत्र में शेरों की संख्या और आवाजाही बढ़ी है तथा अब यहां 55 से 75 शेरों के उपयोग वाला महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र विकसित हो चुका है।

पर्यावरणविदों और ग्रामीणों ने उठाए सवाल

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले इसी आधार पर अनुमति देने से इनकार किया गया था, तो अब परिस्थितियां और अधिक संवेदनशील होने के बावजूद सकारात्मक सिफारिश कैसे दी गई।

उनका आरोप है कि निजी कंपनी के हितों को वन्यजीव संरक्षण से ऊपर रखा जा रहा है। साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि गुजरात हाईकोर्ट में लंबित मामले के रहते ऐसी सिफारिश क्यों की गई।

अधिकारियों के रुख पर भी उठे सवाल

वर्ष 2016 और 2026 की रिपोर्टों में आए विरोधाभास को लेकर भी बहस तेज हो गई है। पूर्व रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया था कि हाईकोर्ट में लायन कॉरिडोर से संबंधित मामला लंबित होने के कारण अंतिम न्यायिक निर्णय से पहले भूमि आवंटन उचित नहीं होगा। वहीं, वर्तमान रिपोर्ट में इस पहलू को पर्याप्त महत्व नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।