ED सिर्फ 1% मामलों में दिला सकी सजा, आयकर विभाग 75% से अधिक केस हारा; राज्यसभा में सरकार का खुलासा

Enforcement Directorate News: राज्यसभा में सीपीआई(एम) सांसद वी. शिवदासन के सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (Income Tax Department) की कार्रवाई से जुड़े आधिकारिक आंकड़े पेश किए। इन आंकड़ों के अनुसार, दोनों एजेंसियों ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए, लेकिन दोषसिद्धि (Conviction) के मामले में उनका प्रदर्शन काफी कमजोर रहा।

5 साल में ED ने दर्ज किए 4,622 केस, दोषसिद्धि दर 1% से भी कम

सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत कुल 4,622 नए मामले दर्ज किए।

हालांकि, इस अवधि में एजेंसी केवल 43 मामलों में दोष सिद्ध करा सकी, जिनमें 104 लोगों को सजा हुई। इस आधार पर ED की दोषसिद्धि दर 1% से भी कम रही।

वित्त वर्ष 2025-26 में ED ने 1,080 नए मामले दर्ज किए, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक हैं। 2021-22 से 2023-24 के बीच मामलों में कमी आई थी, लेकिन 2024-25 और 2025-26 में फिर से वृद्धि दर्ज की गई।

1,243 गिरफ्तारियां, हजारों मामले अब भी अदालतों में लंबित

सरकार के अनुसार, 30 जून 2026 तक ED ने PMLA के तहत विशेष अदालतों में 2,444 शिकायतें दाखिल की हैं और 1,243 लोगों को गिरफ्तार किया है।

इनमें से अधिकांश मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में आरोपी लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं, जबकि अंतिम फैसले अपेक्षाकृत कम मामलों में आए हैं।

आयकर विभाग का भी कमजोर प्रदर्शन

राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वित्त वर्षों में आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम की धारा 279(1) के तहत 2,127 अभियोजन मामले दर्ज किए।

इनमें से केवल 233 मामलों में दोषसिद्धि हुई, जबकि 854 मामलों में आरोपी बरी हो गए। यानी बड़ी संख्या में मामलों में विभाग अदालत में आरोप साबित नहीं कर सका।

वित्त वर्ष 2025-26 में आयकर विभाग केवल 47 मामलों में सजा दिलाने में सफल रहा, जो पिछले दो वर्षों का सबसे कम आंकड़ा है।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ED PMLA के तहत बड़ी संख्या में नए मामले दर्ज करती है, लेकिन मुकदमों का अंतिम निपटारा अपेक्षाकृत धीमी गति से होता है। PMLA के तहत जमानत की प्रक्रिया भी काफी सख्त मानी जाती है, जिसके कारण कई मामलों में आरोपियों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।

वहीं, आयकर विभाग के अभियोजन मामलों में भी अदालतों में दोष सिद्ध कराने की दर अपेक्षाकृत कम रही है।