चीन की चालबाजी का भारत ने दिया करारा जवाब, आधिकारिक नक्शे में अरुणाचल की 27 जगहों के नाम शामिल

India-China Border Row: भारत ने अरुणाचल प्रदेश से जुड़े चीन के नाम बदलने के प्रयासों के खिलाफ अपना रुख और स्पष्ट किया है। भारतीय सर्वे ऑफ इंडिया (Survey of India) ने राज्य के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं को मानकीकृत नामों के साथ आधिकारिक मानचित्र में शामिल किया है। इस कदम का उद्देश्य इन क्षेत्रों की आधिकारिक पहचान को स्पष्ट बनाए रखना और चीन के दावों के सामने भारत का पक्ष मजबूत करना है।

चीन के नाम बदलने के प्रयासों को भारत ने किया खारिज

अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिशों को भारत पहले भी कई बार खारिज कर चुका है। चीन का नागरिक मामलों का मंत्रालय अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ के नाम से संदर्भित करता रहा है और वहां के विभिन्न स्थानों के लिए चीनी नाम जारी करता रहा है।

चीन ने वर्ष 2017 में 6, वर्ष 2021 में 15 और वर्ष 2023 में 11 स्थानों के नाम बदलने की सूची जारी की थी। भारत ने इन कदमों को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि नाम बदलने से अरुणाचल प्रदेश की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता।

1959 और 1962 के संघर्ष से जुड़े स्थान भी शामिल

भारत के आधिकारिक मानचित्र में शामिल 27 स्थानों में लॉन्गजू (Longju) भी शामिल है। यह क्षेत्र 1959 में भारत और चीन के बीच शुरुआती सीमा टकरावों में से एक से जुड़ा रहा है। इसके अलावा अपर सुबनसिरी जिले में लॉन्गजू के पास स्थित माजा गांव को भी मानचित्र में शामिल किया गया है।

सूची में बिसा गांव के साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वतीय दर्रे ड्जो ला, रिजा ला, पुकुर ला और थाग ला भी शामिल हैं। थाग ला क्षेत्र 1962 के भारत-चीन युद्ध के शुरुआती संघर्षों से जुड़ा हुआ है।

सीमा सुरक्षा और शहीदों से जुड़े स्थानों को भी पहचान

27 स्थानों की सूची में चांगलांग जिले का महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स केंद्र जयरामपुर भी शामिल है। इसके अलावा पूर्वी अरुणाचल प्रदेश के कई अन्य स्थानों को भी आधिकारिक मानचित्र में जगह दी गई है।

इनमें शेर-ए-थापा स्मारक, 1962 के युद्ध के शहीद जसवंत सिंह रावत से जुड़ा जसवंतगढ़, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी गांव, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा, कमलांग नगर और बुद्ध मंदिर जैसे स्थान शामिल हैं।

भारत के इस कदम को अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे को लेकर चीन की नामकरण नीति के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, ऐसे मानचित्र और नामकरण किसी क्षेत्र पर वास्तविक संप्रभुता का कानूनी निर्धारण अपने आप नहीं करते।