ईरान के खिलाफ ट्रंप के बदले सुर, हमले के बजाय आर्थिक दबाव पर जोर; अमेरिकी हथियारों के भंडार पर भी चिंता

USA-Iran War Updates: ईरान के साथ महीनों से जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में बदलाव के संकेत मिले हैं। ट्रंप ने हालिया बयान में कहा है कि अमेरिका फिलहाल ईरान के खिलाफ स्थिति को “लो-की” रखते हुए आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। यह रुख उस समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर बातचीत की कोशिशें चल रही हैं।

हॉर्मुज समझौते पर ईरान की नई शर्तों से अड़चन

हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं। हालांकि, ईरान ने इसके लिए कई शर्तें रखी हैं।

ईरान की ओर से अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने, नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, प्रतिबंधों में राहत, अमेरिकी सैनिकों की वापसी और हालिया युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई जैसी मांगें सामने आई हैं। इन शर्तों के कारण समझौते की प्रक्रिया जटिल हो गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के लिए फिलहाल हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित तरीके से फिर से खोलना एक प्रमुख प्राथमिकता बन गया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

अमेरिकी हथियारों के भंडार पर बढ़ी चिंता

इस बीच, लंबे संघर्ष के कारण अमेरिकी सैन्य भंडार पर दबाव बढ़ने की रिपोर्टें भी सामने आई हैं। Reuters के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के साथ करीब पांच महीने चले संघर्ष में बड़ी संख्या में लंबी दूरी की सटीक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट में Patriot और THAAD जैसे एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर के भंडार पर भी दबाव का उल्लेख किया गया है।

Reuters के मुताबिक, अनुमान है कि युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिकी सेना ने लगभग 65% Patriot इंटरसेप्टर और 38% THAAD इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया है। वहीं, अमेरिकी नौसेना के Tomahawk क्रूज मिसाइल भंडार का भी बड़ा हिस्सा इस्तेमाल होने की बात कही गई है।

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी हथियारों की कमी से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार उपलब्ध हैं। दूसरी ओर, रक्षा विशेषज्ञों ने लंबे संघर्ष की स्थिति में हथियारों के भंडार और सैन्य तैयारी को लेकर चिंता जताई है।

अमेरिका के लिए आर्थिक और सैन्य दबाव का संतुलन चुनौती

हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जारी तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। इस मार्ग से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की बड़ी मात्रा गुजरती है, इसलिए यहां लंबे समय तक व्यवधान से कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

ऐसे में ट्रंप प्रशासन के सामने एक तरफ ईरान पर दबाव बनाए रखने और दूसरी तरफ संघर्ष को और बढ़ने से रोकने की चुनौती है। फिलहाल कूटनीति, आर्थिक दबाव और सैन्य विकल्प—तीनों को अमेरिकी रणनीति के हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

नोट: अमेरिकी हथियारों की “भारी कमी” को पूर्ण तथ्य के रूप में लिखना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टें मुख्य रूप से मिसाइल और एयर-डिफेंस स्टॉक में कमी तथा सैन्य भंडार पर बढ़ते दबाव की बात करती हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन ने पर्याप्त हथियार उपलब्ध होने का दावा किया है।