घर में ताश खेलना अपराध नहीं, जब तक ‘मुनाफे का तत्व’ साबित न हो: गुजरात हाईकोर्ट का अहम फैसला

Playing Cards at Home: गुजरात हाईकोर्ट ने निजी घर में ताश खेलने को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के निजी घर में ताश खेलना अपने आप में गुजरात प्रिवेंशन ऑफ गैंबलिंग एक्ट, 1887 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि उस स्थान को ‘कॉमन गेमिंग हाउस’ के रूप में चलाया जा रहा था और वहां से आर्थिक लाभ या मुनाफा कमाया जा रहा था।

2018 के अहमदाबाद मामले में आया फैसला

यह मामला वर्ष 2018 का है। अहमदाबाद के सैटेलाइट इलाके में स्थित एक फ्लैट पर पुलिस ने छापेमारी की थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि वहां जुआ खेला जा रहा है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने पांच लोगों को ताश खेलते हुए पकड़ा था और उनके पास से नकदी तथा ताश के पत्ते बरामद किए थे। इसके बाद आनंदनगर पुलिस स्टेशन में गुजरात जुआ अधिनियम की धाराओं 4 और 5 के तहत मामला दर्ज किया गया।

आरोपियों ने FIR रद्द कराने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि केवल किसी निजी घर में ताश खेलने से वह जगह ‘कॉमन गेमिंग हाउस’ नहीं बन जाती।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

गुजरात हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी स्थान को ‘कॉमन गेमिंग हाउस’ साबित करने के लिए वहां आर्थिक लाभ या मुनाफे का तत्व होना जरूरी है।

अदालत के अनुसार, यदि मकान मालिक या कब्जाधारी ताश खेलने के लिए कोई शुल्क वसूल रहा हो या उससे आर्थिक लाभ कमा रहा हो, तभी उस जगह को जुआघर के रूप में देखा जा सकता है।

सिर्फ यह तथ्य कि कुछ लोग निजी घर में ताश खेल रहे थे और संभवतः पैसों के लिए खेल रहे थे, अपने आप में उस घर को ‘कॉमन गेमिंग हाउस’ साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

पुलिस की FIR में नहीं था पर्याप्त सबूत

कोर्ट ने पाया कि पुलिस की शिकायत में ऐसा कोई स्पष्ट विवरण या सबूत नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित फ्लैट को मुनाफे के उद्देश्य से जुए के अड्डे के रूप में संचालित किया जा रहा था।

अदालत ने यह भी कहा कि केवल घर से ताश के पत्ते और नकदी बरामद होने से उस स्थान को जुआघर नहीं माना जा सकता।

सर्च वारंट लेने के तरीके पर भी सवाल

हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा सर्च वारंट हासिल करने के तरीके पर भी सवाल उठाए। अदालत के अनुसार, पुलिस को सूचना मिलने के बाद महज 23 मिनट में वारंट हासिल कर छापेमारी की गई।

कोर्ट ने इस जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सक्षम अधिकारी ने पर्याप्त जांच और उचित विचार किए बिना वारंट जारी किया।

इसके अलावा, FIR में कहीं भी उस जगह को स्पष्ट रूप से ‘जुआघर’ या ‘कॉमन गेमिंग हाउस’ बताए जाने का आधार नहीं था।

आरोपियों के खिलाफ FIR रद्द

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि यदि शिकायत में यह साबित करने वाला आधार ही नहीं है कि संबंधित जगह ‘कॉमन गेमिंग हाउस’ थी, तो केवल निजी घर में ताश खेलने के आधार पर जुआ अधिनियम की धाराएं लागू नहीं की जा सकतीं।

इसके बाद अदालत ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी कार्रवाई रद्द करने का आदेश दिया।

आसान भाषा में समझें

निजी घर में दोस्तों या परिवार के साथ ताश खेलना अपने आप में अपराध नहीं है। लेकिन यदि किसी जगह पर ताश या जुआ खिलाकर शुल्क लिया जा रहा हो या उससे व्यावसायिक/आर्थिक लाभ कमाया जा रहा हो, तो कानूनी स्थिति अलग हो सकती है।