
US India Trade Tension: अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। रूस से भारत की बढ़ती नजदीकी और कच्चे तेल की खरीद को लेकर पहले से नाराज अमेरिका ने अब भारत पर चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचाने में मदद करने का आरोप लगाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने व्हाइट हाउस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि भारत अमेरिकी जांच के रडार पर है। रिपोर्ट में भारत समेत करीब 40 देशों को चीन के कथित ‘शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क’ से जोड़ा गया है।
गुजरात समेत 3 भारतीय औद्योगिक केंद्र निशाने पर
व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में भारत के गुजरात, चेन्नई और पुणे जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों का उल्लेख किया गया है।
अमेरिकी दावे के मुताबिक, इन केंद्रों में पंप और कंप्रेसर जैसे उत्पादों के निर्माण या प्रोसेसिंग के जरिए कथित तौर पर चीनी सामान की सप्लाई चेन का रास्ता बदला जाता है और फिर उन्हें अमेरिकी बाजार तक पहुंचाया जाता है।
अमेरिका का आरोप है कि इस तरह की गतिविधियों से उसके घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
क्या है ‘शैडो ट्रांसशिपमेंट’ का पूरा मामला?
अमेरिकी रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम’ में दावा किया गया है कि चीन अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए तीसरे देशों का इस्तेमाल कर रहा है।
आरोप के मुताबिक, चीनी उत्पादों को पहले किसी तीसरे देश में भेजा जाता है। वहां उन पर मामूली प्रोसेसिंग, री-पैकेजिंग या री-लेबलिंग के बाद उन्हें उस देश के नाम से अमेरिकी बाजार में भेजा जाता है।
पीटर नवारो के दावे के अनुसार, इस कथित व्यवस्था से अमेरिका को हर साल 19 अरब से 26 अरब डॉलर तक की संभावित टैरिफ आय का नुकसान हो सकता है।
40 से ज्यादा देशों पर उठे सवाल
अमेरिकी रिपोर्ट में भारत के अलावा मैक्सिको, कनाडा, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों का भी उल्लेख किया गया है।
अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि जांच में किसी देश या कंपनी द्वारा टैरिफ से बचने के लिए गलत तरीके अपनाने की पुष्टि होती है, तो भविष्य में अतिरिक्त शुल्क, जुर्माना या अन्य व्यापारिक कार्रवाई की जा सकती है।
रूस से तेल खरीदने पर भी अमेरिका नाराज
भारत और अमेरिका के बीच तनाव का एक अन्य बड़ा मुद्दा रूसी कच्चे तेल की खरीद है।
भारत द्वारा रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका लगातार आपत्ति जताता रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में भारत ने अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 50% हिस्सा रूस से खरीदा था।
इसी मुद्दे पर अमेरिका भारत पर अतिरिक्त 100% टैरिफ लगाने की धमकी भी दे चुका है।
ऐसे में चीन से जुड़े कथित ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क और रूसी तेल खरीद—दोनों मुद्दों के कारण भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
नोट: ‘शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क’ से जुड़े आरोप अमेरिकी प्रशासन/रिपोर्ट में किए गए दावे हैं। किसी भारतीय शहर, कंपनी या पूरे भारतीय उद्योग को अवैध गतिविधि में शामिल मानना तब तक उचित नहीं है जब तक संबंधित जांच में ठोस प्रमाण सामने न आएं।



