2027 में भारत, ब्राजील समेत कई देशों में बढ़ सकता है खाद्य संकट! JPMorgan की चिंताजनक चेतावनी

Global Food Crisis: दुनिया के सामने 2027 में खाद्य महंगाई और खाद्य आपूर्ति से जुड़ा एक बड़ा जोखिम उभर सकता है। JPMorgan के अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि तेजी से मजबूत हो रहा El Niño और ऊंची ऊर्जा कीमतों का मेल अगले साल वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर एशिया और लैटिन अमेरिका के उभरते बाजारों पर पड़ने की आशंका है। इनमें भारत, इंडोनेशिया, ब्राजील और कोलंबिया को विशेष रूप से संवेदनशील बताया गया है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि JPMorgan ने सीधे तौर पर यह भविष्यवाणी नहीं की है कि 2027 में इन देशों में निश्चित रूप से खाद्यान्न खत्म हो जाएगा। रिपोर्ट में मुख्य रूप से खाद्य कीमतों और खाद्य महंगाई में बड़े उछाल के जोखिम को लेकर चेतावनी दी गई है।

ग्लोबल वार्मिंग और भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ सकता है संकट

JPMorgan के अनुसार, मौजूदा El Niño के इस साल के अंत तक बहुत मजबूत या ‘Super El Niño’ बनने की 81% संभावना है। इसके अगले साल तक जारी रहने की संभावना 97% आंकी गई है।

यदि ऐसा होता है तो यह हाल के दशकों के सबसे मजबूत El Niño घटनाक्रमों में से एक हो सकता है। इससे कृषि उत्पादन और वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान का जोखिम बढ़ सकता है।

इसके साथ ही ऊंची ऊर्जा कीमतें डीजल, उर्वरक और खाद्य पैकेजिंग की लागत बढ़ा सकती हैं। इससे किसानों और खाद्य उत्पादकों की लागत बढ़ने के साथ उपभोक्ताओं तक भी महंगाई का असर पहुंच सकता है।

2027 की पहली छमाही में 5% तक पहुंच सकती है खाद्य महंगाई

JPMorgan के अनुमान के मुताबिक, 2027 की पहली छमाही में वैश्विक खाद्य महंगाई वार्षिक आधार पर करीब 5% तक पहुंच सकती है। इससे वैश्विक हेडलाइन महंगाई में लगभग 0.6 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हो सकती है।

अकेले Super El Niño अपने चरम पर वैश्विक खाद्य महंगाई में करीब 0.7 प्रतिशत अंक जोड़ सकता है। यदि इसके साथ ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी भी जारी रहती है, तो खाद्य महंगाई पर कुल प्रभाव करीब 1.3 से 1.5 प्रतिशत अंक तक पहुंच सकता है।

उर्वरक और ऊर्जा की बढ़ती लागत बड़ी चुनौती

खाद्य उत्पादन पर मौसम के साथ-साथ ऊर्जा और उर्वरक की कीमतों का भी सीधा असर पड़ता है। महंगा ईंधन कृषि मशीनरी, परिवहन और सिंचाई की लागत बढ़ाता है, जबकि महंगे उर्वरक से किसानों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है।

JPMorgan ने विशेष रूप से बताया है कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और मौसम संबंधी झटकों का एक साथ असर कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति पर दबाव बढ़ा सकता है।

El Niño से फसलों पर पड़ सकता है असर

El Niño के कारण दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सूखा, अत्यधिक बारिश और अन्य असामान्य मौसमी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसका असर कृषि उत्पादन पर क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

JPMorgan के मुताबिक, El Niño से खाद्य महंगाई पर सबसे बड़ा असर आमतौर पर मौसम संबंधी झटके के चार से आठ महीने बाद दिखाई देता है। यही वजह है कि 2026 में शुरू होने वाला मजबूत El Niño 2027 में खाद्य कीमतों पर ज्यादा प्रभाव डाल सकता है।

भारत पर क्यों पड़ सकता है ज्यादा असर?

भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें JPMorgan ने खाद्य कीमतों के झटके के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बताया है। इसकी एक वजह यह है कि भारतीय परिवारों के उपभोग में भोजन का हिस्सा कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक है और कृषि क्षेत्र मौसम पर काफी निर्भर है।

यदि कमजोर या अनियमित मानसून के कारण उत्पादन प्रभावित होता है, तो धान, दालें, तिलहन, कपास और गन्ने जैसी फसलों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा उर्वरक, डीजल और परिवहन की लागत बढ़ने से किसानों के लिए उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है।

अभी खाद्य संकट निश्चित नहीं, लेकिन जोखिम बढ़ा है

JPMorgan ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियां पिछली बड़ी El Niño घटनाओं की तुलना में कुछ बेहतर हैं। वैश्विक अनाज भंडार पर्याप्त बताए जा रहे हैं, एशिया में चावल का स्टॉक अपेक्षाकृत स्वस्थ है और मौजूदा खाद्य महंगाई भी अपेक्षाकृत कम है।

इसलिए इसे 2027 में निश्चित रूप से खाद्यान्न की कमी होने की भविष्यवाणी के बजाय खाद्य कीमतों, कृषि उत्पादन और महंगाई पर बढ़ते जोखिम की चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। यदि मजबूत El Niño लंबे समय तक ऊंची ऊर्जा कीमतों के साथ बना रहता है, तो इसका असर दुनिया के अलग-अलग देशों में खाद्य महंगाई के बीच बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।