प्याज फिर रुलाएगा: अहमदाबाद में आवक 200 टन घटी, खुदरा कीमत 80 रुपये के पार!

Ahmedabad Onion Price Hike: ईंधन, अनाज, रसोई गैस, खाद्य तेल और चीनी के बाद अब प्याज की बढ़ती कीमतों ने भी आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अहमदाबाद में प्याज का खुदरा भाव बढ़कर 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कृषि बाजार के जानकारों और व्यापारियों का कहना है कि अगले दो महीनों तक प्याज की कीमतों में राहत मिलने की संभावना कम है। आवक में कमी के चलते आने वाले दिनों में कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।

थोक बाजार में भी प्याज 48 से 50 रुपये किलो

अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल मार्केट यार्ड से जुड़े व्यापारियों के अनुसार, प्याज की दैनिक आवक में करीब 200 टन की कमी आई है। फिलहाल अहमदाबाद में सबसे ज्यादा प्याज महाराष्ट्र के नासिक से पहुंच रहा है।

पहले यार्ड में रोजाना करीब 55 से 60 गाड़ियां प्याज लेकर आती थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर महज 38 से 40 गाड़ियां रह गई है। अहमदाबाद यार्ड में पूरे साल प्याज की औसत दैनिक आवक करीब 600 से 700 टन रहती है, जबकि वर्तमान में यह घटकर लगभग 400 से 450 टन रह गई है।

मांग की तुलना में बाजार में आवक कम होने से कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। फिलहाल थोक बाजार में प्याज का भाव 48 से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

अगले दो महीने तक राहत की उम्मीद कम

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून सीजन में बोई गई नई प्याज की फसल दिवाली के आसपास बाजार में आने की उम्मीद है। इससे पहले नई फसल की पर्याप्त आवक संभव नहीं है। ऐसे में अगले करीब दो महीनों तक प्याज के भाव ऊंचे बने रहने की संभावना है।

महाराष्ट्र से आवक में और कमी आती है तो प्याज की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

अहमदाबाद में प्याज की आवक कहां से?

  • नासिक, महाराष्ट्र: 85 से 90 प्रतिशत
  • मध्य प्रदेश: 10 से 12 प्रतिशत
  • स्थानीय बाजार: 2 से 3 प्रतिशत

प्याज के दाम बढ़ने की प्रमुख वजहें

  • पिछली फसल के बाद हुई बारिश से 10 से 15 प्रतिशत तक प्याज खराब होने का दावा।
  • बारिश और नमी के कारण पुराने स्टॉक की गुणवत्ता प्रभावित हुई।
  • लगातार और अनियमित बारिश के चलते नई प्याज की बुवाई में देरी हुई।
  • कीमतें बढ़ने की उम्मीद में पुराने स्टॉक की पर्याप्त मात्रा बाजार में नहीं लाई गई।

नतीजा: आवक घटने और मांग बनी रहने से प्याज की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। इसका सीधा असर आम परिवारों के रसोई बजट पर पड़ रहा है।