अहमदाबाद नगर निगम यानी घोटालों की फैक्ट्री? अधिकारियों पर ही मामले दबाने के आरोप

AMC Vigilance Department Inquiry: अहमदाबाद नगर निगम (AMC) के विजिलेंस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2021 से 2026 के बीच अनियमितताओं, कथित घोटालों और लापरवाही से जुड़ी 2,578 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से केवल 298 मामलों में अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस या दंडात्मक कार्रवाई की गई, जबकि 373 मामले अभी लंबित बताए जा रहे हैं। वहीं, 1,907 मामलों को पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर बंद कर दिया गया।

19 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया, 145 की वेतनवृद्धि रोकी

पिछले छह वर्षों के दौरान की गई कार्रवाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो 145 कर्मचारियों की वेतनवृद्धि निर्धारित अवधि के लिए रोकने की कार्रवाई की गई। वहीं, 73 कर्मचारियों पर आर्थिक दंड लगाया गया।

इसके अलावा 60 कर्मचारियों को नोटिस, एक कर्मचारी की पेंशन में कटौती और सिर्फ 19 कर्मचारियों को सेवा से हटाने की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इन आंकड़ों को लेकर सवाल उठ रहा है कि हजारों शिकायतों के बावजूद गंभीर मामलों में कार्रवाई का स्तर इतना कम क्यों रहा।

हाटकेश्वर ब्रिज मामले में जांच चार साल से जारी

AMC से जुड़े चर्चित मामलों में विजिलेंस विभाग की भूमिका पहले भी सवालों के घेरे में रही है।

हाटकेश्वर ब्रिज मामले में कथित तौर पर 8 कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई थी। इनमें से एक कर्मचारी की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी 7 कर्मचारियों के खिलाफ पिछले करीब चार वर्षों से विभागीय जांच जारी होने की बात सामने आई है।

लंबे समय से जांच जारी रहने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

बिटुमिन रोड घोटाले में 110 कर्मचारियों को क्लीनचिट

वर्ष 2014 से 2017 के दौरान करीब 450 करोड़ रुपये के सड़क कार्यों में कथित तौर पर घटिया गुणवत्ता वाले बिटुमिन के इस्तेमाल का मामला सामने आया था।

इस मामले में 110 कर्मचारियों से कुल 1.19 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया था। हालांकि, वर्ष 2025 में जांच पूरी होने के बाद इन सभी 110 कर्मचारियों को क्लीनचिट दिए जाने की जानकारी सामने आई।

इसके बाद विजिलेंस जांच की निष्पक्षता और कार्रवाई की गंभीरता को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

पंपिंग स्टेशनों की जांच भी अधर में

शहर के करीब 200 पंपिंग स्टेशनों की जांच के दौरान 40 स्टेशनों पर निर्धारित अनुबंध की तुलना में कम कर्मचारी पाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद नगर आयुक्त ने जांच के आदेश दिए थे।

हालांकि, यह जांच भी अभी तक पूरी नहीं हुई है।

VS अस्पताल में क्लिनिकल ट्रायल मामले में भी सवाल

वर्ष 2021 से 2025 के बीच VS अस्पताल में 58 लोगों पर कथित तौर पर गैरकानूनी क्लिनिकल ट्रायल से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया था।

मामले की जांच के लिए 5 अधिकारियों की कमेटी बनाई गई थी। आरोप है कि कमेटी ने गंभीर कार्रवाई के बजाय केवल अनुशासनहीनता के स्तर पर हल्की कार्रवाई की सिफारिश की, जिससे मामला प्रभावी कार्रवाई के बिना ही समाप्त हो गया।

हजारों शिकायतें, लेकिन कड़ी कार्रवाई कितनी?

AMC विजिलेंस से जुड़े सामने आए आंकड़ों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। 2,578 शिकायतों में से 1,907 मामलों का सबूतों के अभाव में बंद होना और केवल 19 कर्मचारियों को सेवा से हटाया जाना अब राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का मुद्दा बन गया है।

विपक्ष और शिकायतकर्ताओं की ओर से मांग उठ रही है कि संवेदनशील मामलों की स्वतंत्र जांच, जांच में देरी की समीक्षा और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।