सिर्फ 17% बारिश से सौराष्ट्र के किसानों की आंखों में आंसू, बीज-खाद का खर्च भी डूबने का डर

Gujarat Monsoon Crisis: गुजरात में मानसून की शुरुआत में अच्छी बारिश की उम्मीद के साथ किसानों ने जोखिम उठाकर खरीफ फसलों की बुवाई की थी। महंगे बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च करने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि इस बार फसल अच्छी होगी। लेकिन कई इलाकों में लंबे समय से बारिश थमने के कारण अब किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो मूंगफली समेत कई फसलें सूखने की कगार पर पहुंच सकती हैं और किसानों पर उत्पादन लागत का बोझ पड़ सकता है।

दक्षिण और मध्य गुजरात के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है। नवसारी, सूरत, भरूच और डांग में भी भारी बारिश दर्ज की गई। इसके विपरीत सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के कई हिस्सों में बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

द्वारका, जामनगर, पोरबंदर और कच्छ में हालात चिंताजनक

द्वारका, जामनगर, पोरबंदर और कच्छ में बारिश की कमी को लेकर किसानों की चिंता सबसे ज्यादा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि इन क्षेत्रों में लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं हुई है और कई इलाकों में करीब 60 दिनों से बारिश का इंतजार है।

किसानों का कहना है कि राज्य की किसान सहायता योजना में सूखे की स्थिति के आकलन के लिए लंबे समय तक बारिश नहीं होने को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। ऐसे में इन जिलों में सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए सरकार से राहत और सिंचाई की व्यवस्था करने की मांग की जा रही है।

इन इलाकों में अब तक बारिश सामान्य से काफी कम बताई जा रही है और कई खेतों में खड़ी फसल सूखने लगी है।

कच्छ में सिंचाई की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं

सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात में मानसून कमजोर रहने के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। कई इलाकों में पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं होने से किसान बारिश पर ही निर्भर हैं।

समय पर बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलों को पानी की जरूरत है। किसान सरकार से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और प्रभावित क्षेत्रों के लिए तत्काल राहत पैकेज घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

बारिश नहीं हुई तो इन फसलों पर असर

बारिश का लंबा अंतराल जारी रहा तो गुजरात में कई खरीफ फसलों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इनमें मुख्य रूप से:

  • मूंगफली
  • कपास
  • तिल
  • उड़द
  • अन्य तिलहन
  • दलहन

शामिल हैं।

किसानों ने खेतों में ट्रैक्टर चलाया, मवेशी छोड़ने की नौबत

बारिश की उम्मीद में बोई गई फसलें अब कई जगह किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई हैं। राजकोट, द्वारका, पोरबंदर और कच्छ के कुछ इलाकों में मूंगफली की फसल को नुकसान पहुंचने की खबरों के बीच कुछ किसानों ने खेतों में ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया है।

कुछ किसानों ने खराब हो चुकी फसल वाले खेतों में मवेशियों को छोड़ दिया, ताकि कम से कम चारे के रूप में फसल का उपयोग किया जा सके।

अब किसानों की नजर पूरी तरह आसमान पर टिकी है। समय रहते पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो फसल नुकसान के साथ किसानों पर बीज, खाद, मजदूरी और खेती की पूरी लागत डूबने का खतरा बढ़ सकता है।