विनाशकारी बाढ़ के बीच विदेशी मदद से इनकार करने वाले नेपाल ने बदला रुख, भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

Nepal Flash Flood News: विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड से जूझ रहे नेपाल में विदेशी सहायता को लेकर चल रहे विवाद के बीच सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल और प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा है कि नेपाल ने किसी मित्र देश या अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद लेने से कभी इनकार नहीं किया।

शनिवार तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इस भीषण आपदा में 587 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 1900 लोग पहाड़ी इलाकों और सुरंगों में मलबे के नीचे फंसे या लापता बताए जा रहे हैं।

शुरुआत में स्थानीय सुरक्षा बलों पर क्यों रखा भरोसा?

नेपाल सरकार के मुताबिक, दुर्गम पहाड़ी इलाकों और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों से नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान बेहतर तरीके से परिचित हैं। ऐसे खतरनाक और अनजान इलाकों में सीधे विदेशी बचाव दलों को उतारने से समन्वय और तकनीकी दिक्कतें पैदा होने की आशंका थी।

इसी वजह से शुरुआती चरण में राहत एवं बचाव अभियान के लिए नेपाल ने अपने 15,000 से अधिक स्थानीय सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा।

अब DNA टेस्ट और टनल रेस्क्यू में विदेशी विशेषज्ञों की मदद

शुरुआत में अपने संसाधनों से ही रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा करने पर जोर देने के बाद अब आपदा की गंभीरता को देखते हुए नेपाल ने सीमित अंतरराष्ट्रीय सहायता स्वीकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

विशेष रूप से हाइड्रोपावर परियोजनाओं की अंधेरी सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, शवों की फोरेंसिक जांच और DNA टेस्टिंग जैसे तकनीकी कार्यों में विदेशी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।

भारत और चीन से मांगी मदद

बाढ़ के तेज बहाव में रसुवा और नुवाकोट जिलों के तीन दर्जन से अधिक पुल बह गए, जिससे कई इलाकों का संपर्क टूट गया है। प्रभावित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज बनाने में सहयोग मांगा है।

बेली ब्रिज ऐसे अस्थायी पुल होते हैं, जिन्हें अपेक्षाकृत कम समय में तैयार करके आपदा के बाद सड़क संपर्क बहाल किया जा सकता है।

भारत ने तुरंत बढ़ाया मदद का हाथ

नेपाल की अपील के बाद भारत ने राहत एवं बचाव अभियान में सहायता तेज कर दी है। भारत की ओर से अब तक 57.5 टन से अधिक राहत सामग्री की तीन खेप भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए काठमांडू पहुंचाई गई हैं।

इसके अलावा भारत ने टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की टीम, 11 सदस्यीय मेडिकल टीम और बेली ब्रिज निर्माण के लिए विशेष तकनीकी दल भी नेपाल भेजे हैं।

आपदा की भयावहता के बीच नेपाल का बदला हुआ रुख और भारत की त्वरित सहायता दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग और आपदा प्रबंधन साझेदारी की अहमियत को दर्शाते हैं।