
Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई प्राकृतिक आपदा और विनाशकारी बाढ़ के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा तथा नेपाल घूमने गए भारतीयों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नेपाल में संपर्क से बाहर हुए लोगों की संख्या 150 से अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच गुजरात के 8 और पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही नेपाल में लापता गुजरातियों की कुल संख्या बढ़कर 24 हो गई है। आपदा की खबर मिलते ही गुजरात के परिवारों में चिंता का माहौल है। राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के लगातार संपर्क में है।
अमरेली-आणंद समेत अमेरिका-कनाडा के NRG भी लापता
जानकारी के मुताबिक, लापता हुए पर्यटक नेपाल-चीन सीमा के नजदीक यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। बाढ़ के कारण टेलीफोन और इंटरनेट नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गया, जिससे परिवारों का अपने परिजनों से संपर्क टूट गया।
लापता गुजरातियों में अमेरिका और कनाडा में रहने वाले NRG भी शामिल बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार दो लोग अमेरिका और दो लोग कनाडा के स्थायी निवासी हैं, जो नेपाल घूमने पहुंचे थे। विदेशी नागरिकता रखने वाले इन गुजरातियों की सुरक्षा को लेकर भी संबंधित स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।
टूर एवं ट्रैवल एजेंटों के अनुसार, चीन-तिब्बत सीमा पर इमिग्रेशन प्रक्रिया के दौरान वहां बड़ी संख्या में यात्री मौजूद थे। इसी दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मच गई। बताया जा रहा है कि इमिग्रेशन सेंटर भी बाढ़ की चपेट में आ गया। ऐसे में वहां मौजूद कई लोगों के बह जाने की आशंका जताई जा रही है।
वलसाड की रोमा ईंटवाला सुरक्षित
इस बीच गुजरात के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। नेपाल यात्रा पर गईं वलसाड की रोमा बहन ईंटवाला सुरक्षित हैं। वलसाड के मामलतदार ने उनसे संपर्क कर उनकी सुरक्षा की पुष्टि की है। इसके बाद परिवार ने राहत की सांस ली।
गुजरात सरकार का आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है। केंद्र सरकार के माध्यम से काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर लापता गुजरातियों की जानकारी जुटाने तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कवायद की जा रही है।
लापता गुजरातियों की सूची
- दिनेश पटेल — अमरेली (अमेरिका)
- शिल्पाबेन पटेल — आणंद-खेड़ा (अमेरिका)
- कामताप्रसाद बाबूलाल उर्फ गोमतीदास बापू — जाफराबाद
- पद्माबेन पटेल — कनाडा
- जगदीश पटेल — आणंद (कनाडा)
- बीनाबेन परिख — अहमदाबाद (अमेरिका)
- पूनम ठक्कर — अहमदाबाद (अमेरिका)
- भाविका रामजी — सूरत (दक्षिण अफ्रीका)
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी मंडराया संकट
चीन सीमा पर इमिग्रेशन कार्यालय सहित कई बुनियादी ढांचे के बाढ़ में बह जाने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि अगले वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए चीन सीमा वाला मार्ग चालू हो पाएगा या नहीं।
यदि सीमा क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर समय पर दोबारा तैयार नहीं हुआ तो अगले वर्ष इस मार्ग से यात्रा प्रभावित हो सकती है। फिलहाल भविष्य की यात्रा को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सुरक्षित यात्रियों को लौटने में आएगा अतिरिक्त खर्च
कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे गुजरातियों के सामने भी बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। चीन सीमा वाला रूट बंद होने के कारण यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग से काठमांडू लौटना पड़ सकता है।
ट्रैवल एजेंटों के मुताबिक, परमिट में बदलाव होने पर करीब 400 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ सकती है, जिससे यात्रियों का खर्च बढ़ सकता है। बाढ़ के कारण होटल और घरों को भी नुकसान पहुंचा है, इसलिए यात्रियों को ठहरने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल कई गुजराती यात्री सरकार की मदद और सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं। बताया गया है कि ल्हासा रूट फिलहाल सुरक्षित है।



