गुजरात के मंत्रियों के सोशल मीडिया फॉलोअर्स में गिरावट, हर्ष संघवी और रिवाबा जडेजा समेत कई नाम चर्चा में

Gujarat Ministers Social Media Followers: गुजरात सरकार के कई मंत्रियों के सोशल मीडिया फॉलोअर्स में गिरावट का दावा सामने आया है। वायरल हो रही एक सूची में 10 अप्रैल 2026 और 29 अगस्त 2026 के बीच मंत्रियों के Instagram, X (Twitter) और Facebook फॉलोअर्स की तुलना की गई है। इसमें गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी, रिवाबा जडेजा, जीतू वाघाणी, अर्जुन मोढवाडिया, कुंवरजी बावलिया, ईश्वरसिंह पटेल, संजय महिडा, मनीषा वकील और कमलेश पटेल समेत कई नेताओं के आंकड़े दिए गए हैं।

हर्ष संघवी और रिवाबा जडेजा के फॉलोअर्स में बड़ी कमी

वायरल सूची के अनुसार, हर्ष संघवी के Instagram फॉलोअर्स 10 अप्रैल को करीब 12 लाख थे, जो 29 अगस्त तक घटकर करीब 10.80 लाख रह गए। यानी लगभग 1.20 लाख फॉलोअर्स की कमी दर्ज की गई।

वहीं, रिवाबा जडेजा के फॉलोअर्स में इससे भी बड़ी गिरावट दिखाई गई है। सूची के मुताबिक उनके फॉलोअर्स करीब 26 लाख से घटकर 20.50 लाख रह गए, यानी लगभग 5.50 लाख की कमी बताई गई है।

कई अन्य मंत्रियों के फॉलोअर्स भी घटे

वायरल आंकड़ों में गुजरात के कई अन्य मंत्रियों के सोशल मीडिया फॉलोअर्स में भी कमी दिखाई गई है। इनमें जीतू वाघाणी, अर्जुन मोढवाडिया, कुंवरजी बावलिया, ईश्वरसिंह पटेल, संजय महिडा और कमलेश पटेल के नाम शामिल हैं।

हालांकि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म समय-समय पर निष्क्रिय, फर्जी या बॉट अकाउंट्स को हटाते रहते हैं। इसलिए केवल फॉलोअर्स की संख्या में कमी को सीधे तौर पर जनता की नाराजगी या राजनीतिक समर्थन में गिरावट का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

सोशल मीडिया लोकप्रियता पर उठे सवाल

मंत्रियों की सोशल मीडिया मौजूदगी पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक संचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों और क्षेत्रीय गतिविधियों को जनता तक पहुंचाने के लिए नेता Facebook, Instagram और X जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।

ऐसे में फॉलोअर्स में अचानक बदलाव ने सोशल मीडिया पर मंत्रियों की डिजिटल लोकप्रियता और उसके वास्तविक राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

विपक्ष ने साधा निशाना

फॉलोअर्स में कथित गिरावट को लेकर विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि मंत्रियों को सोशल मीडिया की लोकप्रियता के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

विपक्ष का आरोप है कि गुजरात में बेरोजगारी, महंगाई, सरकारी भर्ती, सड़क, पानी और प्रशासनिक समस्याओं जैसे मुद्दे मौजूद हैं और सरकार को इन पर जवाब देना चाहिए।

हालांकि, वायरल सूची में दिए गए आंकड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स के स्क्रीनशॉट/तुलनात्मक डेटा पर आधारित हैं और इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि फॉलोअर्स की कमी का कारण निश्चित रूप से जनता की नाराजगी ही है।

क्या फॉलोअर्स की कमी राजनीतिक असर दिखाती है?

सोशल मीडिया फॉलोअर्स किसी नेता की डिजिटल पहुंच का एक संकेतक जरूर हो सकते हैं, लेकिन यह सीधे तौर पर चुनावी लोकप्रियता या वोट बैंक को नहीं दर्शाते। राजनीतिक प्रभाव का आकलन करने के लिए जमीनी समर्थन, चुनावी प्रदर्शन, जनमत सर्वेक्षण और वास्तविक जनसंपर्क जैसे कई अन्य कारकों को भी देखना जरूरी होता है।

फिलहाल वायरल आंकड़ों ने गुजरात के मंत्रियों की सोशल मीडिया लोकप्रियता को लेकर नई राजनीतिक बहस जरूर छेड़ दी है।