दीव के समुद्र तट पर स्थित पांडवकालीन शिवालय, समुद्र देव करते हैं दिन-रात जलाभिषेक; जानिए इतिहास

Gangeshwar Mahadev: गुजरात और आसपास के समुद्री तटों पर भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं। इनमें कुछ बेहद प्रसिद्ध हैं, जबकि कुछ मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के कारण आज भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ऐसा ही एक मंदिर केंद्र शासित प्रदेश दीव के समुद्र तट पर स्थित है, जिसे गंगेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने की थी। यहां समुद्र की लहरें लगातार शिवलिंग का जलाभिषेक करती हैं।

क्या है पौराणिक कथा?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, वनवास के दौरान पांचों पांडव दीव के समुद्र तट पर पहुंचे थे। इसके बाद सभी पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की। मान्यता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव यहां शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए।

कहा जाता है कि पांडवों ने अमावस्या की रात यहां इन स्वयंभू शिवलिंगों की पूजा-अर्चना की थी। मंदिर में पांच शिवलिंग स्थापित हैं। मान्यता है कि प्रत्येक शिवलिंग के सामने नंदी की प्रतिमा भी स्थापित थी, लेकिन समय के साथ ये प्रतिमाएं नष्ट हो गईं।

समुद्र देव दिनभर करते हैं जलाभिषेक

गंगेश्वर महादेव मंदिर की सबसे खास बात इसका समुद्र के बिल्कुल किनारे स्थित होना है। समुद्र की लहरें मंदिर में स्थापित शिवलिंग तक पहुंचती हैं और लगातार उनका जलाभिषेक करती हैं। ज्वार के दौरान यह दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है।

मंदिर परिसर में भगवान गणेश, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं। आसपास का वातावरण बेहद शांत है और मंदिर में पहुंचने पर समुद्र की लहरों की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई देती है।

क्यों पड़ा नाम गंगेश्वर महादेव?

अरब सागर के किनारे स्थित इस मंदिर को गंगेश्वर महादेव कहा जाता है। भगवान शिव के अनेक नामों में से एक नाम गंगेश्वर भी है। मान्यता है कि भगवान शिव ने माता गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था, इसलिए उन्हें गंगेश्वर नाम से भी जाना जाता है।

मंदिर में पांच शिवलिंग होने के कारण इसे ‘पंच शिवलिंग मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय लोग इसे ‘समुद्र किनारे वाला मंदिर’ भी कहते हैं।

आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम

गंगेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक स्थिति के लिए भी खास है। एक तरफ प्राचीन शिवलिंग और पौराणिक मान्यताएं हैं, तो दूसरी तरफ अरब सागर की लहरें भगवान शिव का निरंतर जलाभिषेक करती दिखाई देती हैं। यही अनोखा संगम इस मंदिर को दीव के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में शामिल करता है।