भारतीयों को अमेरिकी ग्रीन कार्ड के लिए 179 साल तक करना पड़ सकता है इंतजार! 10 लाख लोग कतार में, जानिए क्या है वजह

US Green Card Wait for Indians: EB-2 श्रेणी में भारतीयों का बैकलॉग बेहद लंबा, देश-आधारित सीमा और सीमित ग्रीन कार्ड संख्या बनी बड़ी वजह

अमेरिका में स्थायी रूप से बसने और ग्रीन कार्ड पाने का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए इंतजार की अवधि बेहद लंबी होती जा रही है। नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के विश्लेषण के अनुसार, रोजगार आधारित EB-2 श्रेणी में नए भारतीय आवेदकों के लिए संभावित प्रतीक्षा अवधि 179 साल तक पहुंच सकती है।

इसका अर्थ यह है कि यदि कोई भारतीय पेशेवर आज EB-2 श्रेणी के तहत प्रक्रिया शुरू करता है, तो मौजूदा अनुमान के आधार पर उसका नंबर 22वीं सदी के बहुत आगे जाकर आ सकता है। हालांकि, यह 179 साल का आंकड़ा एक अनुमानित प्रतीक्षा अवधि है, निश्चित व्यक्तिगत समयसीमा नहीं।

EB-2 में 179 साल, EB-3 में 38 साल तक का अनुमान

भारतीय आवेदकों के लिए अलग-अलग रोजगार आधारित श्रेणियों में प्रतीक्षा अवधि में बड़ा अंतर है।

  • EB-2: उच्च शैक्षणिक योग्यता या विशेष क्षमता वाले पेशेवरों के लिए संभावित प्रतीक्षा अवधि करीब 179 साल तक।
  • EB-3: कुशल श्रमिकों और अन्य पेशेवरों के लिए संभावित प्रतीक्षा अवधि करीब 38 साल
  • EB-1: असाधारण क्षमता वाले लोगों और कुछ उच्च प्राथमिकता वाले आवेदकों की श्रेणी में प्रतीक्षा अवधि तुलनात्मक रूप से कम, लगभग 4 से 5 साल बताई गई है।

इस लंबे इंतजार का सबसे बड़ा असर उन भारतीय पेशेवरों पर पड़ता है जो वर्षों से अमेरिका में अस्थायी कार्य वीजा पर रहकर स्थायी निवास की उम्मीद कर रहे हैं।

करीब 10 लाख भारतीय रोजगार आधारित आव्रजन की कतार में

NFAP के विश्लेषण के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक करीब 10 लाख भारतीय रोजगार आधारित अमेरिकी आव्रजन की लंबी कतार में थे।

EB-1, EB-2 और EB-3 जैसी प्रमुख श्रेणियों को मिलाकर कुल रोजगार आधारित बैकलॉग करीब 12.6 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।

पिछले कुछ वर्षों में इस बैकलॉग में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जबकि उपलब्ध ग्रीन कार्ड की संख्या सीमित बनी हुई है।

आखिर इतनी लंबी कतार क्यों बनी?

अमेरिकी ग्रीन कार्ड व्यवस्था में लंबा बैकलॉग बनने के पीछे कई कानूनी और संरचनात्मक कारण हैं।

1. रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की वार्षिक सीमा

अमेरिकी आव्रजन कानून के तहत रोजगार आधारित आव्रजन के लिए हर वर्ष 1,40,000 ग्रीन कार्ड की मूल सीमा निर्धारित है। इसमें कुछ पारिवारिक आव्रजन से अप्रयुक्त संख्या जुड़ने के कारण वास्तविक उपलब्धता कुछ वर्षों में अधिक हो सकती है।

2. देश-आधारित सीमा

अमेरिकी व्यवस्था में किसी एक देश के नागरिकों को रोजगार आधारित आव्रजन में एक निश्चित सीमा से अधिक ग्रीन कार्ड देने पर प्रतिबंध है। सामान्य नियम के तहत यह सीमा 7 प्रतिशत है।

भारत जैसे बड़े देश से बड़ी संख्या में उच्च-कुशल पेशेवर अमेरिका जाते हैं। ऐसे में आवेदकों की संख्या और उपलब्ध स्थायी निवास की संख्या के बीच बड़ा अंतर पैदा हो जाता है।

3. भारतीय पेशेवरों का लगातार बढ़ता दबाव

अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, चिकित्सक और अन्य उच्च-कुशल पेशेवर कार्यरत हैं। इनमें से कई लोग लंबे समय से रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में हैं।

नतीजा यह है कि नई अर्जियां जुड़ती जाती हैं, जबकि पुराने आवेदकों की कतार अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ती है।

H-1B पर निर्भर परिवारों के लिए बढ़ी अनिश्चितता

ग्रीन कार्ड में देरी का असर केवल नौकरी करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक H-1B जैसे अस्थायी कार्य वीजा पर रहने वाले भारतीय परिवारों के लिए भविष्य की योजना बनाना भी मुश्किल हो सकता है।

करियर, बच्चों की शिक्षा, घर खरीदने और लंबे समय के निवेश जैसे फैसलों पर स्थायी आव्रजन स्थिति की अनिश्चितता का असर पड़ सकता है।

इसका असर अमेरिकी कंपनियों पर भी पड़ता है, क्योंकि लंबे समय तक स्थायी निवास की स्पष्ट राह नहीं होने से वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उन्हें लंबे समय तक बनाए रखने में चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीति से बढ़ी चिंता

यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ी है।

वीजा जांच, आव्रजन आवेदनों की समीक्षा और निर्वासन से जुड़ी नीतियों में कड़ाई ने अमेरिका में रह रहे विदेशी नागरिकों के बीच चिंता बढ़ाई है। कुछ कार्य वीजा श्रेणियों में शुल्क और अतिरिक्त जांच से जुड़ी नीतियों ने भी अमेरिका जाने और वहां लंबे समय तक रहने की लागत तथा अनिश्चितता बढ़ाई है।

हालांकि, इन नीतियों और ग्रीन कार्ड के दशकों लंबे बैकलॉग को एक ही कारण का परिणाम मानना सही नहीं होगा। भारतीयों के लिए मौजूदा लंबी प्रतीक्षा मुख्य रूप से रोजगार आधारित आव्रजन की सीमाओं और वर्षों से जमा बैकलॉग की संरचनात्मक समस्या है।

अमेरिका में भारतीय मूल की बड़ी आबादी

अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगातार बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2024 तक अमेरिका में भारत में जन्मे लोगों की संख्या करीब 32 लाख थी। विदेशी जन्मे लोगों के समूहों में भारतीय मूल के लोग सबसे बड़े समूहों में शामिल हैं।

यही बड़ी और लगातार बढ़ती पेशेवर आबादी रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की मौजूदा व्यवस्था पर दबाव को और स्पष्ट करती है।