
Sensex and Nifty Down News: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में फिसल गए। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच आईटी शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार का रुख कमजोर कर दिया।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 264 अंक तक गिरकर 76,251 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 23,818 तक फिसल गया। आईटी क्षेत्र बाजार में सबसे ज्यादा दबाव में रहा।
खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
शुक्रवार को सेंसेक्स 76,515.43 और निफ्टी 23,897.70 पर बंद हुए थे। सोमवार को कमजोर शुरुआत के बाद दोनों सूचकांकों में और गिरावट देखी गई।
सुबह के कारोबार में 16 प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में से 14 में गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी आईटी सूचकांक करीब 1.7 प्रतिशत तक गिर गया, जिससे बाजार का समग्र माहौल कमजोर हुआ।
आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
बाजार की गिरावट में आईटी कंपनियों के शेयरों का बड़ा योगदान रहा। शुरुआती कारोबार में इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयर दबाव में रहे।
इन्फोसिस में करीब 2.4 प्रतिशत, एचसीएल टेक में करीब 1.9 प्रतिशत और टीसीएस में करीब 1.2 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई।
आईटी शेयरों पर दबाव की एक बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की बढ़ती आशंका है। हालिया अमेरिकी रोजगार आंकड़े मजबूत रहने से बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर में दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। ऊंची ब्याज दरों से अमेरिकी कंपनियों के खर्च और आईटी सेवाओं की मांग प्रभावित होने की आशंका रहती है।
बाजार गिरने के 4 बड़े कारण
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।
महंगा कच्चा तेल भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। इससे महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर शेयर बाजार की धारणा पर पड़ता है।
2. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने से निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बना रहे हैं।
इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है और तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
3. अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ी आशंका
हाल के अमेरिकी रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद बाजार में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना बढ़ी है। इससे अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न आकर्षक हो सकता है और उभरते बाजारों में निवेश के प्रति सतर्कता बढ़ सकती है।
इसके अलावा निवेशक इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर भी नजर रख रहे हैं।
4. आईटी शेयरों में तेज बिकवाली
सोमवार की गिरावट में आईटी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। निफ्टी आईटी सूचकांक में करीब 1.7 प्रतिशत की गिरावट आई।
भारतीय आईटी कंपनियों की बड़ी आय अमेरिकी बाजार से आती है। इसलिए अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका और कंपनियों के तकनीकी खर्च में संभावित कमी की चिंता ने इस क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बढ़ाया।
बाजार में आगे क्या रहेगा नजर?
फिलहाल बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों से प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बनी हुई है। 4 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब ₹3,112 करोड़ की बिकवाली की थी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹8,930 करोड़ की खरीदारी की।



