
Gujarat Drug Abuse: गुजरात में नशे के बढ़ते कारोबार को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों और विभिन्न रिपोर्टों के आधार पर राज्य में बड़ी संख्या में लोग शराब, चरस, गांजा, भांग, अफीम, सिंथेटिक ड्रग्स और नशीली दवाओं के सेवन की गिरफ्त में होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, 40 लाख नियमित नशा करने वालों का आंकड़ा आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया है, इसलिए इसे अनुमानित आंकड़े के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गुजरात में नशे की गंभीर स्थिति
करीब 7 करोड़ की आबादी वाले गुजरात में नशे की समस्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग किसी न किसी रूप में नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। इनमें नियमित रूप से नशा करने वालों की संख्या करीब 40 लाख होने का दावा किया गया है।
कोरोना महामारी के बाद पारंपरिक नशे के साथ-साथ सिंथेटिक ड्रग्स और नशीली दवाओं की मांग बढ़ने की बात भी सामने आई है। एक ओर पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार करोड़ों रुपये के मादक पदार्थ जब्त कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर नशे की लत से लोगों को बाहर निकालने और पुनर्वास की वास्तविक स्थिति को लेकर पर्याप्त आंकड़ों की कमी दिखाई देती है।
दर्द निवारक दवाओं के दुरुपयोग की भी चिंता
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार गुजरात में शराब के अलावा चरस, अफीम, गांजा, भांग और नशीली दवाओं का सेवन करने वालों की संख्या भी काफी है।
राज्यसभा में प्रस्तुत नेशनल सब्सटेंस यूज सर्वे से जुड़े आंकड़ों के हवाले से दावा किया गया है कि गुजरात में बड़ी संख्या में लोग दर्द निवारक तथा नींद या शांत करने वाली दवाओं के दुरुपयोग के शिकार हैं। इसके अलावा महिलाओं में भी गांजा, भांग और नशीली दवाओं के सेवन की समस्या सामने आने का दावा किया गया है।
हालांकि, अलग-अलग स्रोतों में दिए गए आंकड़ों में अंतर हो सकता है। इसलिए इन्हें राज्य में नशे की समस्या की व्यापकता का संकेत मानना अधिक उचित होगा, न कि प्रत्येक व्यक्ति की वर्तमान स्थिति का सटीक आंकड़ा।
सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता खतरा
गुजरात में पारंपरिक नशीले पदार्थों के साथ अब सिंथेटिक ड्रग्स भी बड़ी चुनौती बन रहे हैं। उपलब्ध गैर-आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, एक लाख से अधिक युवा सिंथेटिक ड्रग्स और अन्य नशीली दवाओं की गंभीर लत से जूझ रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी शराब और विभिन्न मादक पदार्थों के सेवन को लेकर बड़ी संख्या में मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में गुजरात के लिए भी केवल मादक पदार्थों की जब्ती तक सीमित रहने के बजाय नशा रोकथाम, उपचार और पुनर्वास पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी माना जा रहा है।
पांच साल में ₹13,600 करोड़ से अधिक का ड्रग्स जब्त
गुजरात पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की कार्रवाई को लेकर पुलिस महानिदेशक की ओर से बताया गया है कि पिछले पांच वर्षों में करीब ₹13,600 करोड़ मूल्य का 1.39 लाख किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ जब्त किया गया।
इस अवधि में ड्रग्स से जुड़े 3,700 से अधिक मामले दर्ज किए गए और 5,348 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। कार्रवाई का उद्देश्य राज्य में मादक पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर अंकुश लगाना बताया गया है।
हालांकि, ड्रग्स जब्ती और गिरफ्तारियों के आंकड़ों के मुकाबले इस अवधि में कितने लोगों को उपचार और पुनर्वास के माध्यम से नशे से मुक्त कराया गया, इसका विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने का सवाल भी उठता है।
34 जिलों में नशामुक्ति केंद्र
नशे की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले में नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने की दिशा में कदम उठाया है। बताया गया है कि राज्य के 34 जिलों में 15 बिस्तरों की क्षमता वाले नशामुक्ति केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
नशामुक्ति से जुड़ी सेवाओं के लिए सरकार की ओर से करीब ₹41 करोड़ का प्रावधान किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इसके साथ ही निजी पुनर्वास केंद्रों और चिकित्सकों की भूमिका भी बढ़ी है। हालांकि, निजी केंद्रों द्वारा मरीजों से ली जाने वाली फीस और उपचार की गुणवत्ता को लेकर निगरानी तथा नियमन भी महत्वपूर्ण मुद्दा है।
सात दिनों में सभी जिलों और शहरों में एंटी नारकोटिक्स विंग
ड्रग्स के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए गुजरात पुलिस ने राज्य के सभी जिलों और शहरों में एंटी नारकोटिक्स विंग शुरू करने का निर्णय लिया है।
पुलिस महानिदेशक ज्ञानेन्द्र सिंह मलिक ने अगले सात दिनों में इन विशेष इकाइयों को शुरू करने के निर्देश दिए हैं। योजना के तहत अहमदाबाद और सूरत में दो-दो तथा वडोदरा और राजकोट में एक-एक विशेष इकाई बनाई जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक जिला स्तर पर भी एक विशेष इकाई गठित की जाएगी।
प्रत्येक इकाई में:
- 1 पुलिस निरीक्षक
- 1 पुलिस उपनिरीक्षक
- 2 सहायक उपनिरीक्षक या हेड कांस्टेबल
- 4 कांस्टेबल
यानी कुल 8 पुलिसकर्मियों की विशेष टीम होगी। टीम को अलग वाहन और चालक भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इन विशेष इकाइयों को दूसरी सरकारी या सामान्य कानूनी जिम्मेदारियों से अलग रखा जाएगा, ताकि उनका पूरा ध्यान ड्रग्स तस्करों, बिक्री नेटवर्क और नशीले पदार्थों के प्रमुख ठिकानों पर कार्रवाई करने पर रहे।
निष्कर्ष
गुजरात में ड्रग्स के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तेज होने के बावजूद चुनौती केवल मादक पदार्थों को जब्त करने तक सीमित नहीं है। नशे की मांग कम करना, युवाओं को नशे से दूर रखना, समय पर उपचार उपलब्ध कराना और नशामुक्ति के बाद पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। 40 लाख नशाग्रस्त लोगों का आंकड़ा अनुमानित है, इसलिए इसे आधिकारिक संख्या के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।



