
Ahmedabad Auto Taxi Strike: अहमदाबाद में 7 सितंबर से रिक्शा और टैक्सी चालकों की हड़ताल शुरू हो गई है। हालांकि, शहर के कई मार्गों पर शटल रिक्शाएं चलती दिखाई दीं। हड़ताल का मुख्य विरोध ऑनलाइन माध्यम से बुक होने वाली रिक्शा, टैक्सी और बाइक सेवाओं को लेकर है। कुछ चालकों पर शटल रिक्शाओं से यात्रियों को जबरन उतारने और उन्हें बैठने नहीं देने के आरोप भी सामने आए हैं।
चालकों का कहना है कि ऑनलाइन परिवहन सेवाओं के कारण उनकी कमाई में बड़ी गिरावट आई है। यूनियनों की प्रमुख मांग है कि रिक्शा और टैक्सी चालकों को कम से कम ₹20 प्रति किलोमीटर का उचित किराया मिले और ऑनलाइन बाइक सेवाओं पर कार्रवाई की जाए।
ऑनलाइन बाइक सेवाएं बंद करने की मांग
रिक्शा चालक विशाल दंताणी के मुताबिक, ऑनलाइन बाइक सेवाएं नियमों के खिलाफ संचालित की जा रही हैं। उनका आरोप है कि जिस दूरी के लिए रिक्शा का किराया करीब ₹50 होता है, उसी दूरी के लिए ऑनलाइन बाइक सेवा में यात्री को लगभग ₹20 में यात्रा की सुविधा मिल जाती है।
उन्होंने कहा कि कुछ मार्गों पर शटल रिक्शाएं अभी भी चल रही हैं, लेकिन हड़ताल कर रहे चालक उन्हें रोककर खाली करवाने और आंदोलन में शामिल होने की अपील कर रहे हैं।
चालकों की मांग है कि ऑनलाइन बाइक सेवाओं के संचालन को लेकर सरकार स्पष्ट कार्रवाई करे और रिक्शा के लिए ₹20 प्रति किलोमीटर का किराया तय किया जाए।
ऑनलाइन ऐप से कम किराया मिलने की शिकायत
इस्कॉन स्टैंड से ऑटो चलाने वाले रिक्शा चालक मंसूरी अब्दुल मुनाफ इकबाल का कहना है कि ऑनलाइन ऐप के माध्यम से उन्हें कई बार प्रति किलोमीटर केवल ₹11 से ₹13 तक का भुगतान मिलता है।
उनके मुताबिक, यदि किराया ₹20 प्रति किलोमीटर तय किया जाए तो ऑनलाइन माध्यम से रिक्शा चलाने में उन्हें आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऑनलाइन बाइक सेवाओं में कई वाहन उचित व्यावसायिक अनुमति के बिना चलाए जा रहे हैं।
चालकों का दावा है कि ऑनलाइन बाइक सेवाओं के बढ़ने के बाद उनकी आय में करीब 50 प्रतिशत तक कमी आई है। इसके अलावा सीएनजी की बढ़ती कीमतों और महंगाई ने भी उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ा दी है।
हड़ताल के दिन ऑनलाइन कंपनियों ने किराया बढ़ाया?
टैक्सी चालक मोहम्मद शोएब ने ऑनलाइन कंपनियों की किराया व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सामान्य दिनों में लंबी दूरी की यात्रा के बावजूद चालक को बहुत कम राशि मिलती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि करीब 16 से 18 किलोमीटर की यात्रा के लिए उन्हें एक दिन केवल ₹241 का किराया मिला, जबकि कंपनी के कमीशन और ईंधन खर्च के बाद उनके पास बहुत कम राशि बचती है।
उनका दावा है कि ऑनलाइन सेवाओं के कारण उनकी आय में 60 से 70 प्रतिशत तक असर पड़ा है।
शोएब के अनुसार, हड़ताल के दिन ऑनलाइन कंपनियों की ओर से किराया अचानक काफी बढ़ गया। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट तक करीब 16 किलोमीटर की यात्रा के लिए जहां एक दिन पहले लगभग ₹350 किराया दिखाया जा रहा था, वहीं हड़ताल के दिन यही किराया करीब ₹952 तक पहुंच गया।
हालांकि, ये आंकड़े संबंधित चालक द्वारा बताए गए हैं और अलग-अलग समय, मांग तथा दूरी के अनुसार ऑनलाइन किराए में बदलाव हो सकता है।
करीब 2 लाख रिक्शा-टैक्सी प्रभावित होने का दावा
यूनियनों के अनुसार, अहमदाबाद शहर और आसपास के क्षेत्रों में 7 से 10 सितंबर तक करीब 2 लाख रिक्शा और टैक्सी के पहिए थमने का दावा किया गया है।
ऑनलाइन माध्यम से बुक होने वाली सेवाओं में चालकों को पर्याप्त भुगतान नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए यह आंदोलन शुरू किया गया है। हड़ताल लंबी चलने की स्थिति में इसका सीधा असर आम यात्रियों की आवाजाही पर पड़ सकता है।
हालांकि, यूनियन की ओर से दावा किया गया है कि स्कूल रिक्शा और वैन सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया है।
कम किराया और बढ़ती लागत बना मुख्य मुद्दा
रिक्शा और टैक्सी यूनियनों का कहना है कि सीएनजी, वाहन रखरखाव और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, ऑनलाइन टैक्सी और परिवहन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण यात्रियों को कम किराए में सेवा उपलब्ध कराने की कोशिश होती है।
चालकों का आरोप है कि इसका आर्थिक बोझ आखिरकार उन पर पड़ रहा है और कई मामलों में उन्हें प्रति किलोमीटर बहुत कम राशि मिलती है। यूनियनें चाहती हैं कि सरकार ऑनलाइन परिवहन सेवाओं के लिए उचित किराया और चालक भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करे।
मांगें नहीं मानी गईं तो राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
फिलहाल आंदोलन अहमदाबाद, गांधीनगर और साणंद क्षेत्र तक सीमित बताया जा रहा है। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन की हड़ताल के बाद भी उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को पूरे गुजरात में फैलाया जा सकता है।
इसके अलावा बड़े पैमाने पर रैली निकालकर आरटीओ और गांधीनगर स्थित संबंधित सरकारी कार्यालयों का घेराव करने की चेतावनी भी दी गई है।
यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी
चार दिनों तक रिक्शा और टैक्सी सेवाएं प्रभावित रहने से आम यात्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रोजाना कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा हवाई अड्डे तक आने-जाने वाले यात्रियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है।
ऐसे में यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि शटल और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहती हैं तो यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है।



