अहमदाबाद के माणेकचौक में 150 से ज्यादा अवैध सोना-चांदी की भट्टियां सक्रिय, बड़े हादसे का खतरा

Ahmedabad Manek Chowk Illegal Furnaces: अहमदाबाद के ऐतिहासिक माणेकचौक और आसपास के इलाकों को विरासत क्षेत्र के रूप में विकसित करने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर, इसी इलाके में चल रही कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियां स्थानीय लोगों की सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, माणेकचौक और आसपास के रिहायशी इलाकों में सोना-चांदी गलाने और पॉलिश करने वाली 150 से अधिक भट्टियां संचालित हो रही हैं। कुछ दिन पहले रात के समय एक इकाई में आग लगने की घटना भी सामने आई थी, जिसके बाद प्रशासन ने कुछ इकाइयों की जांच कर नोटिस जारी किए थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसी गतिविधियां अब भी जारी हैं।

रिहायशी इलाकों में चल रहा व्यावसायिक काम

माणेकचौक, खाड़िया और आसपास के पुराने शहर क्षेत्र में लंबे समय से रिहायशी इलाकों के भीतर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सोना-चांदी गलाने और पॉलिश करने वाली इकाइयों से निकलने वाले धुएं और अपशिष्ट के कारण क्षेत्र की हवा और पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

रसायन और कचरे से प्रदूषण का आरोप

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, कुछ इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट और अन्य कचरे को कथित तौर पर सीधे सीवर और नालियों में बहा दिया जाता है। इससे नालियां जाम होने और जल निकासी व्यवस्था में खराबी की समस्या बढ़ने का दावा किया गया है।

केवल सोना-चांदी से जुड़े कारोबार ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक, कागज, गेंद और बेयरिंग के गोदाम भी रिहायशी क्षेत्रों में संचालित होने की शिकायत है। आरोप है कि प्लास्टिक और लोहे का कचरा नालियों में फेंके जाने से बार-बार जल निकासी व्यवस्था बाधित होती है।

एलपीजी और आग से सुरक्षा को लेकर सवाल

स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा concern आग की सुरक्षा को लेकर है। इन इकाइयों में लगातार एलपीजी गैस के इस्तेमाल के साथ बिजली की सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, आपात स्थिति में बाहर निकलने के रास्ते और पर्याप्त वेंटिलेशन जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।

सवाल यह है कि क्या इन सभी इकाइयों के पास आवश्यक अनुमतियां हैं और क्या वे अग्नि सुरक्षा तथा पर्यावरण संबंधी सभी नियमों का पालन कर रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा इस स्तर पर व्यापक जांच नहीं की जा रही है।

विरासत इमारतों की सुरक्षा पर भी सवाल

माणेकचौक और आसपास के पुराने शहर क्षेत्र में कई ऐतिहासिक और विरासत इमारतें मौजूद हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन क्षेत्रों को विकसित और प्रचारित किया जा रहा है।

ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि रिहायशी इलाकों में चल रही भट्टियों, गोदामों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से इन ऐतिहासिक इमारतों को किसी तरह का नुकसान तो नहीं हो रहा। उनका कहना है कि वे इस संबंध में कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।

बहरामपुरा, दाणीलीमड़ा और अन्य इलाकों में भी शिकायतें

माणेकचौक के अलावा बहरामपुरा, दाणीलीमड़ा, ईसनपुर और नरोडा जैसे इलाकों में भी रिहायशी मकानों में कथित तौर पर व्यावसायिक गतिविधियां चलने की शिकायतें हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक धुआं और कचरा खुले में छोड़ दिया जाता है। इसके कारण रात के समय आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण बढ़ने और लोगों को सांस लेने में परेशानी तथा आंखों में जलन होने की शिकायतें सामने आती हैं।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित विभागों की विस्तृत जांच और आधिकारिक रिपोर्ट जरूरी है।

इन इलाकों में सबसे ज्यादा गतिविधियां होने का दावा

स्थानीय लोगों के अनुसार, निम्नलिखित क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों की शिकायतें अधिक हैं:

  • घांची की पोल
  • डेडकानी पोल
  • रूपासूरचंदनी पोल
  • लुहार की पोल
  • गुसा पारिख की पोल
  • रतनपोल
  • खेतरपाल की पोल
  • बंधारा का खांचा
  • मोची की खड़की

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

माणेकचौक जैसे घनी आबादी और ऐतिहासिक महत्व वाले क्षेत्र में यदि बड़ी संख्या में भट्टियां और अन्य औद्योगिक गतिविधियां नियमों के विपरीत चल रही हैं, तो आग, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और आपातकालीन निकासी जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।

ऐसे में संबंधित विभागों द्वारा सभी इकाइयों का व्यापक सुरक्षा निरीक्षण, आवश्यक अनुमतियों की जांच और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करना जरूरी है। खासतौर पर हाल में आग की घटना सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।