दहेगाम में ‘किसान ग्राहक बाजार’ का कमाल, बिचौलियों का मुनाफा हुआ उजागर; 14 टन सब्जियां आधे दाम में बिकीं

Dahegam APMC Farmers Market: दहेगाम कृषि उपज मंडी समिति (APMC) ने किसानों और आम उपभोक्ताओं के हित में एक अनोखी पहल शुरू की है। अहमदाबाद रोड पर औडा तालाब के बाहर शुरू किए गए ‘किसान ग्राहक बाजार’ में किसान सीधे अपनी सब्जियां उपभोक्ताओं तक पहुंचा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिल रहा है, क्योंकि यहां कई सब्जियां दूसरे बाजारों की तुलना में आधे से भी कम कीमत पर उपलब्ध हैं।

इस बाजार ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि किसान से निकलने वाली सब्जियां बिचौलियों की लंबी श्रृंखला से गुजरने के बाद उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते इतनी महंगी क्यों हो जाती हैं।

किसानों और ग्राहकों को सीधा फायदा

दहेगाम के इस खुले बाजार को स्थानीय लोगों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। एक ओर किसानों को अपनी उपज सीधे ग्राहकों को बेचने का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं को ताजी सब्जियां काफी कम कीमत पर मिल रही हैं।

खासकर गृहिणियों और रोजाना सब्जी खरीदने वाले ग्राहकों ने इस बाजार को नियमित रूप से जारी रखने की मांग की है।

दहेगाम में कीमतें और दूसरे बाजारों में बड़ा अंतर

बाजार में उपलब्ध कीमतों की तस्वीर से दोनों जगहों के दामों में काफी अंतर दिखाई देता है।

सब्जीअन्य शहरों के बाजार का भावदहेगाम किसान बाजार
आलू₹30/kg₹10/kg
प्याज₹80–100/kg₹60/kg
भिंडी₹40/kg₹20/kg
चौली₹50–60/kg₹40/kg
मिर्च₹50/kg₹40/kg
बैंगन₹30/kg₹20/kg
पालक₹40/kg₹30/kg
टमाटर₹50/kg₹30/kg

यानी कई सब्जियों में ग्राहकों को ₹10 से ₹70 प्रति किलो तक की बचत हो रही है। खासतौर पर आलू और प्याज जैसी रोजमर्रा की सब्जियों में कीमत का अंतर काफी स्पष्ट है।

किसानों और ग्राहकों के साथ नगरपालिका को भी फायदा

दहेगाम बाजार समिति ने इस किसान ग्राहक बाजार के लिए दहेगाम नगरपालिका से तीन महीने के किराये पर जगह ली है। इसके बदले एपीएमसी नगरपालिका को हर महीने ₹40 हजार किराया दे रही है।

इस व्यवस्था से नगरपालिका को नियमित आय मिल रही है, जबकि किसानों और ग्राहकों को सीधे जोड़कर बिचौलियों के बिना खरीद-बिक्री का मंच तैयार किया गया है।

इस मॉडल से किसानों को अपनी उपज के लिए सीधे ग्राहक मिल रहे हैं और उपभोक्ताओं को कम कीमत में ताजी सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं।

सिर्फ दो दिन में 14 टन सब्जियों की बिक्री

इस बाजार की लोकप्रियता का अंदाजा बिक्री के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। पहले ही दिन करीब 4,000 किलो सब्जियां बिकीं। दूसरे दिन शाम 5 बजे तक 10,000 किलो से अधिक सब्जियों की बिक्री हो गई।

इस तरह केवल दो दिनों में करीब 14,000 किलो यानी 14 टन सब्जियां बिक गईं।

कम कीमत और ताजी सब्जियों के कारण ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। स्थिति यह रही कि लगातार दो दिनों में शाम करीब 5 बजे तक स्टॉक खत्म हो गया। मांग को देखते हुए दहेगाम एपीएमसी के अलावा आलमपुर से भी अतिरिक्त सब्जियां मंगानी पड़ीं।

अब गांधीनगर में भी ऐसी व्यवस्था की मांग

दहेगाम के किसान ग्राहक बाजार को मिल रही सफलता के बाद अब गांधीनगर के सेक्टर-21 और नए सेक्टरों में भी इसी तरह के खुले बाजार शुरू करने की मांग उठ रही है।

लोगों का कहना है कि यदि किसान और उपभोक्ता सीधे जुड़ें तो दोनों को फायदा हो सकता है। ऐसे बाजारों का विस्तार होने से किसानों को बेहतर दाम और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर ताजी सब्जियां मिल सकती हैं।

दहेगाम का यह मॉडल फिलहाल महंगाई के बीच किसान और ग्राहक के बीच सीधी बिक्री के एक प्रभावी उदाहरण के तौर पर चर्चा में है।