
US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर ही भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकारों ने निजी बैठकों में उन्हें आगाह किया है कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध उनकी मौजूदा राष्ट्रपति अवधि के अंत यानी जनवरी 2029 तक भी जारी रह सकता है।
यह आकलन ट्रंप के सार्वजनिक बयानों से बिल्कुल अलग है। ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त हो जाएगा। 9 सितंबर को उन्होंने कहा कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद युद्ध खत्म हो जाएगा।
वेंस और रुबियो समेत शीर्ष अधिकारियों की अलग राय
रिपोर्ट के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस और सिचुएशन रूम में हुई बैठकों के दौरान युद्ध के लंबे खिंचने की आशंका पर चर्चा की है।
अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि ईरान अब तक अमेरिकी दबाव के सामने झुकने के संकेत नहीं दे रहा है। लंबी सैन्य तैनाती, आर्थिक प्रतिबंध और नौसैनिक दबाव के बावजूद ईरान के प्रतिरोध को देखते हुए संघर्ष के जल्दी खत्म होने की गारंटी नहीं है।
इसके विपरीत, ट्रंप का सार्वजनिक रुख काफी अलग है। उनका कहना है कि ईरान अमेरिकी आर्थिक दबाव का ज्यादा समय तक सामना नहीं कर पाएगा और मध्यावधि चुनाव के बाद युद्ध समाप्त हो जाएगा। उन्होंने यह आरोप भी लगाया है कि ईरान अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
होर्मुज में बढ़ा तनाव, 10 जहाजों पर हमले का दावा
युद्ध का सबसे गंभीर मोर्चा अब होर्मुज जलडमरूमध्य बनता जा रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने क्षेत्र में 10 जहाजों को निशाना बनाया, जबकि इससे पहले अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट किया था। इस समुद्री संघर्ष में कम से कम एक नाविक की मौत और एक के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर भी मिसाइल हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों पर हमलों के बावजूद वहां तैनात अमेरिकी कर्मियों को कोई नुकसान नहीं हुआ था। हालांकि, बाद की रिपोर्टों में अमेरिकी सैन्य विमानों को नुकसान पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।
होर्मुज में घटा तेल परिवहन, कच्चा तेल 100 डॉलर के पार
अमेरिका-ईरान संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है और यहां बढ़ते सैन्य तनाव के कारण समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
रॉयटर्स के अनुसार, मंगलवार को होर्मुज से केवल छह मालवाहक जहाज गुजरे, जो पिछले 10 दिनों के औसत से काफी कम थे। इस मार्ग से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और युद्ध के बढ़ते जोखिम के कारण ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। 9 सितंबर को ब्रेंट 100 डॉलर से ऊपर चला गया, जिससे दुनिया भर में ईंधन और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ट्रंप का दावा बनाम अधिकारियों की चिंता
एक तरफ ट्रंप नवंबर के चुनाव के तुरंत बाद युद्ध खत्म होने की बात कह रहे हैं, वहीं उनके ही वरिष्ठ सलाहकार संघर्ष के जनवरी 2029 तक जारी रहने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में अमेरिका-ईरान युद्ध का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। तेल आपूर्ति, वैश्विक महंगाई, समुद्री व्यापार और भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका दबाव बढ़ सकता है।



