भारत के पास कितने परमाणु हथियार? पाकिस्तान-चीन की बढ़ा सकता है चिंता, रिपोर्ट में बड़ा अनुमान

India Nuclear Arsenal: अमेरिका स्थित Federation of American Scientists (FAS) के हालिया अनुमान के अनुसार, भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में करीब 190 परमाणु हथियार हो सकते हैं। इनमें से लगभग 160 हथियार विभिन्न सक्रिय प्रक्षेपण प्रणालियों से जुड़े होने का अनुमान है।

हालांकि, यह आंकड़ा आधिकारिक नहीं है। परमाणु शक्ति संपन्न देश आमतौर पर अपने परमाणु हथियारों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं करते। इसलिए FAS जैसे स्वतंत्र संगठनों के अनुमान को उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर किया गया आकलन माना जाता है।

करीब 190 हथियारों का अनुमान

रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल परमाणु हथियारों की संख्या करीब 190 मानी गई है, जबकि लगभग 160 हथियार मौजूदा प्रक्षेपण प्रणालियों के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।

शेष हथियारों को उन प्रणालियों के लिए तैयार रखा गया माना जाता है जो अभी विकास या उत्पादन के विभिन्न चरणों में हैं। इनमें अग्नि-प्राइम और समुद्र से प्रक्षेपित की जाने वाली K-4 जैसी मिसाइल प्रणालियां शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, अतिरिक्त हथियारों का मौजूद होना जरूरी नहीं कि किसी तरह की अव्यवस्था को दर्शाता हो। नई प्रक्षेपण प्रणालियां सेवा में आने पर पहले से तैयार हथियारों का इस्तेमाल तेजी से किया जा सकता है।

अतिरिक्त परमाणु हथियार रखने के पीछे क्या रणनीति?

अतिरिक्त हथियारों का भंडार रखने का एक प्रमुख उद्देश्य भविष्य की जरूरतों के लिए तैयारी बनाए रखना और नई प्रक्षेपण प्रणालियों के साथ उन्हें तेजी से तैनात करने की क्षमता रखना है।

भारत लंबे समय से अपनी परमाणु नीति में ‘विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता’ पर जोर देता रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य किसी भी संभावित परमाणु खतरे के खिलाफ पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना है।

हालांकि, FAS का यह आंकड़ा बाहरी अनुमान है और भारत सरकार ने अपने परमाणु हथियारों की आधिकारिक संख्या सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए वास्तविक संख्या इससे अलग हो सकती है।

‘नो फर्स्ट यूज’ नीति पर भारत का रुख

भारत की परमाणु नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘नो फर्स्ट यूज’ यानी परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति रही है। भारत ने अपने आधिकारिक परमाणु सिद्धांत में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को गंभीर परिस्थितियों और प्रतिरोधक क्षमता के संदर्भ में रखा है।

इसके अलावा भारत ने परमाणु परीक्षणों पर अपनी स्वैच्छिक रोक भी बनाए रखी है। हालांकि, परमाणु नीति और भविष्य के परमाणु रुख को लेकर समय-समय पर राजनीतिक एवं रणनीतिक बहस होती रही है।

जमीन, समुद्र और हवा—तीनों मोर्चों पर क्षमता

भारत अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को केवल जमीन से प्रक्षेपित होने वाली मिसाइलों तक सीमित नहीं रखता। देश की रणनीतिक क्षमता में भूमि आधारित मिसाइलें, समुद्र आधारित प्रणालियां और वायुसेना के मंच तीनों शामिल हैं।

अग्नि-प्राइम और K-4 जैसी नई प्रणालियों के विकास से भारत की लंबी दूरी की प्रतिरोधक क्षमता और मजबूत होने की संभावना है। इस तरह भारत धीरे-धीरे अपनी परमाणु त्रिस्तरीय क्षमता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।