
Vijay Mallya Case: कारोबारी विजय माल्या ने भले ही बैंकों के बकाये की करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्ति की वसूली करा दी हो, लेकिन इससे उनके खिलाफ चल रही धनशोधन की आपराधिक कार्यवाही अपने आप खत्म नहीं होगी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट किया है।
संपत्ति की वसूली का मतलब केस खत्म होना नहीं
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ED और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले बैंक कंसोर्टियम से पूछा था कि क्या विजय माल्या का बकाया कर्ज चुका दिया गया है।
8 सितंबर को दाखिल अपने हलफनामे में ED ने बताया कि अगस्त 2021 के मूल्यांकन के अनुसार 14,131.6 करोड़ रुपये की माल्या की चल और अचल संपत्तियां SBI के नेतृत्व वाले बैंक कंसोर्टियम को सौंप दी गई हैं।
हालांकि, ED ने साफ किया कि इन संपत्तियों की वसूली का अर्थ यह नहीं है कि माल्या के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला स्वतः समाप्त हो गया है या जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई वापस ले ली है।
PMLA के तहत आपराधिक कार्रवाई जारी रहेगी
ED ने अदालत में दलील दी कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत संपत्तियों की बहाली वैध दावेदारों को उनके नुकसान की भरपाई दिलाने की कानूनी व्यवस्था है।
एजेंसी के अनुसार, यदि बैंकों को उनके दावे के अनुरूप बड़ी राशि वापस मिल जाती है, तब भी इससे माल्या के खिलाफ PMLA के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही निरर्थक नहीं हो जाती।
2020 की माल्या की याचिका पर सुनवाई
बॉम्बे हाईकोर्ट फिलहाल वर्ष 2020 में विजय माल्या द्वारा दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई कर रहा है। माल्या ने विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उनके जब्त किए गए assets का इस्तेमाल बैंकों के कर्ज की वसूली के लिए करने की अनुमति दी गई थी।
9,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण से जुड़ा मामला
विजय माल्या पर अपनी बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए लगभग 9,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण में से कम से कम 3,500 करोड़ रुपये के कथित गबन और धनशोधन का आरोप है।
ED ने वर्ष 2016 में माल्या की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया था। अब संपत्तियों की वसूली के बावजूद उनके खिलाफ PMLA से जुड़ी कानूनी कार्यवाही जारी रहने का मुद्दा बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष है।



