गणपति उत्सव के साथ बढ़ी ‘उत्सव अर्थव्यवस्था’, 10 साल में कारोबार ढाई गुना बढ़कर 250 करोड़ रुपये के पार

Ahmedabad Ganesh Utsav Boom: गणेश चतुर्थी के साथ अहमदाबाद में आस्था और उत्सव का रंग चढ़ने लगा है। कभी घरों और छोटे सार्वजनिक पंडालों तक सीमित रहने वाला गणेशोत्सव अब एक बड़े धार्मिक और कारोबारी आयोजन का रूप ले चुका है। गणपति प्रतिमा से लेकर सजावट, फूल, मंडप, रोशनी, ध्वनि व्यवस्था, मिठाई और पूजा सामग्री तक कई कारोबारों को इस उत्सव से सीधे फायदा मिल रहा है।

व्यापारियों के अनुसार, गणेशोत्सव के 10 दिनों के दौरान अहमदाबाद में करीब 250 करोड़ रुपये की उत्सव अर्थव्यवस्था तैयार हो जाती है। पिछले एक दशक में इस बाजार का आकार करीब ढाई गुना बढ़ने का दावा किया जा रहा है।

सार्वजनिक गणेशोत्सव के पीछे धार्मिक नहीं, राष्ट्रवादी उद्देश्य भी था

सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं है। ब्रिटिश शासन के दौरान सार्वजनिक सभाओं और बड़े जमावड़ों पर कई तरह के प्रतिबंध थे। ऐसे समय में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव को जनजागरण और राष्ट्रवादी चेतना का माध्यम बनाया।

घर-घर होने वाली गणपति पूजा को सार्वजनिक पंडालों तक लाकर बड़ी संख्या में लोगों को एक मंच पर एकत्र करने की परंपरा विकसित हुई। समय के साथ यह आयोजन धार्मिक आस्था, सामूहिक भागीदारी और भव्य समारोह का रूप लेता गया।

गणेशोत्सव बना कारोबार का बड़ा अवसर

आज अहमदाबाद में छोटी सोसायटियों से लेकर बड़े सार्वजनिक पंडालों और कॉरपोरेट कार्यालयों तक गणपति की स्थापना की जाती है। इसके साथ प्रतिमा बनाने वाले कारीगरों से लेकर मंडप सजाने वाले, फूल विक्रेता, रोशनी और ध्वनि व्यवस्था करने वाले, खानपान कारोबारी तथा मिठाई विक्रेताओं तक कई छोटे-बड़े व्यवसायों को काम मिलता है।

यानी गणपति के आगमन के साथ ही बाजार में एक अलग तरह की मौसमी मांग पैदा हो जाती है।

10 साल में ढाई गुना बढ़ा गणेशोत्सव का बाजार

दस वर्ष पहले गुजरात में गणेशोत्सव का विस्तार आज की तुलना में काफी सीमित था। उस समय अहमदाबाद में इस उत्सव से जुड़ा कारोबार करीब 100 करोड़ रुपये के आसपास बताया जाता था।

अब बढ़ती भागीदारी, बड़े आयोजनों और वस्तुओं की बढ़ी कीमतों के बीच यह बाजार करीब 250 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। इस तरह गणेशोत्सव धार्मिक आयोजन के साथ-साथ हजारों लोगों के लिए रोजगार और आय का मौसमी स्रोत भी बन गया है।

मोदीक और मोतीचूर के लड्डू की मांग बढ़ी

गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए मोदीक और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। कारोबारियों के अनुसार, इस बार भी मोदीक और मोतीचूर के लड्डू की बिक्री में तेजी आई है।

गणपति दर्शन के लिए आने वाले ग्राहकों और श्रद्धालुओं को लौटते समय मिठाई का डिब्बा देने की परंपरा भी बढ़ रही है। इसके चलते गणेशोत्सव के दौरान मिठाई की कुल मांग में 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा व्यावसायिक ग्राहकों का होने का दावा किया जा रहा है।

मोदीक में हर साल नई किस्में बाजार में आ रही हैं। वर्तमान में कई दुकानों पर अलग-अलग स्वाद और प्रकार के मोदीक उपलब्ध हैं। दूध, मावा, सूखे मेवे और रसोई गैस जैसी लागत बढ़ने के कारण मिठाइयों के दाम में करीब 15 प्रतिशत तक वृद्धि बताई जा रही है। एक किलोग्राम मोदीक की कीमत करीब 680 रुपये तक पहुंच गई है।

सोने के मुकुट और चांदी की पूजा सामग्री की भी मांग

गणेशोत्सव के दौरान सोने-चांदी के आभूषणों और पूजा सामग्री की बिक्री में भी तेजी देखी जा रही है। गणपति की स्थापना के लिए चांदी की पाट की मांग प्रमुख है।

इसके अलावा चांदी और हीरे से सजे हार, कड़े, कुंडल, कमरबंद और बाजूबंद जैसी वस्तुएं भी खरीदी जा रही हैं। गणपति के वाहन मूषक की चांदी की प्रतिमा की भी मांग बताई जा रही है।

वहीं, गणपति के लिए सोने के मुकुट भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पूजा के लिए चांदी की थाली, कटोरी, चम्मच, गिलास और कलश जैसी वस्तुओं की बिक्री भी बढ़ी है।

फूलों की मांग बढ़ी, लेकिन आवक घटी

गणेशोत्सव में फूलों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में करीब 15 से 20 प्रतिशत बढ़ने की बात व्यापारियों ने कही है। दूसरी ओर, फलों की आवक में कमी के कारण कीमतों पर भी असर पड़ा है।

नरोदा फल बाजार के व्यापारियों के अनुसार, सेब और नाशपाती जैसे फल मुख्य रूप से कश्मीर और शिमला से आते हैं। मौसम में बदलाव, अत्यधिक गर्मी, भारी बारिश और कुछ क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण फसल प्रभावित होने से बाजार में आवक कम हुई है। इसके चलते फलों की कीमतों में करीब 30 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई जा रही है।

फूलों की बिक्री छह गुना तक बढ़ी, गुड़हल भी महंगा

सामान्य दिनों में अहमदाबाद के बाजारों में प्रतिदिन करीब 10 से 12 हजार किलोग्राम फूल बिकने की बात कही जाती है। गणेशोत्सव के दौरान यही बिक्री बढ़कर 50 हजार किलोग्राम से अधिक पहुंच जाती है।

गेंदे के पीले और केसरिया फूलों की मांग सबसे अधिक रहती है। अहमदाबाद और आसपास के बाजारों में आने वाले फूलों का बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के नासिक से आता है। गणेशोत्सव के दौरान वहां भी मांग बढ़ने के कारण मध्य प्रदेश से भी फूल मंगाए जाते हैं।

सामान्य दिनों में गेंदा, गुलाब, ऑर्किड और कार्नेशन जैसे फूल करीब 70 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम में मिलते हैं, जबकि गणेशोत्सव के दौरान इनके दाम 200 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की बात कही गई है।

वहीं, सामान्य दिनों में करीब 5 रुपये में मिलने वाला लाल गुड़हल अब लगभग 10 रुपये प्रति फूल तक पहुंच गया है।