
Gujarat VAT Refunds Pending: गुजरात में वैट व्यवस्था खत्म हुए करीब दस साल होने को हैं, लेकिन इसके बावजूद अहमदाबाद समेत राज्य के हजारों व्यापारियों का करोड़ों रुपये का वैट रिफंड अब तक अटका हुआ है। व्यापारियों का आरोप है कि जीएसटी लागू होने के बाद वैट खातों से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं के कारण रिफंड की प्रक्रिया लंबे समय से बाधित है।
जीएसटी में जाने के बाद वैट खाते नहीं हो रहे अपडेट
1 जुलाई 2017 से देश में जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को वैट व्यवस्था से जीएसटी प्रणाली में स्थानांतरित कर दिया गया। व्यापारियों का कहना है कि इसके बाद वैट पोर्टल पर उनके बैंक खातों की जानकारी सही तरीके से प्रदर्शित नहीं हो रही है।
कई मामलों में रिफंड का आदेश जारी होने के बावजूद लेखा शाखा में बैंक खाता दिखाई नहीं देने के कारण भुगतान आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
लॉक वैट खातों में सुधार की भी सुविधा नहीं
व्यापारियों के अनुसार, पुराने वैट खाते अब लॉक हो चुके हैं। ऐसे में बैंक खाते या अन्य जानकारी में सुधार करना भी मुश्किल हो गया है।
करीब एक दशक से वैट खाते संचालित नहीं होने के कारण कई व्यापारियों के पास पुराने लॉगिन आईडी और पासवर्ड भी उपलब्ध नहीं हैं। जिन व्यापारियों के पास जानकारी मौजूद है, वे भी खाते लॉक होने के कारण आवश्यक बदलाव नहीं कर पा रहे हैं।
बैंक खाते की पुष्टि के लिए मांगा जा रहा शपथपत्र
व्यापारियों का कहना है कि जब विभागीय अधिकारियों को पुराने वैट खाते में बैंक खाता दिखाई नहीं देता, तो उनसे यह प्रमाणित करने के लिए शपथपत्र मांगा जाता है कि संबंधित बैंक खाता वास्तव में उनका ही है।
व्यापारियों की आपत्ति है कि अतीत में इसी बैंक खाते में रिफंड प्राप्त हो चुका होने के बावजूद दोबारा शपथपत्र की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।
इसके अलावा रिफंड स्वीकृति से जुड़े कई मामले गांधीनगर स्थित अतिरिक्त आयुक्त के पास भेजे जाने के कारण भी भुगतान में देरी होने की बात सामने आई है। व्यापारियों के अनुसार, कुछ मामलों में करीब दो महीने से रिफंड जारी नहीं हुआ है।
एक ही फाइल पर बार-बार आपत्तियों का आरोप
व्यापारियों ने विभाग के जीआर सेल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि रिफंड से जुड़ी फाइलों को बार-बार नए मुद्दे उठाकर वापस भेजा जाता है, जिससे प्रक्रिया लंबी खिंचती है।
अपील से जुड़े मामलों में 25 लाख रुपये से अधिक के रिफंड के लिए उपायुक्त और 50 लाख रुपये से अधिक के रिफंड के लिए अतिरिक्त आयुक्त की मंजूरी की आवश्यकता बताई गई है।
व्यापारियों का दावा है कि एक ही फाइल पर अलग-अलग समय में कई बार आपत्तियां उठने से कुछ मामलों में दो से तीन साल तक की देरी हो रही है।
व्यापारियों की मांग—पुराने मामलों का जल्द निपटारा हो
व्यापारियों का कहना है कि वैट व्यवस्था समाप्त हुए लगभग एक दशक बीतने के बावजूद पुराने रिफंड मामलों का लंबित रहना गंभीर प्रशासनिक समस्या है। उनकी मांग है कि रिफंड से जुड़े पुराने मामलों का तेजी से निपटारा किया जाए और अनावश्यक आपत्तियों तथा दस्तावेजी प्रक्रिया के कारण होने वाली देरी को समाप्त किया जाए।
नोट: रिफंड में देरी और विभागीय प्रक्रिया से जुड़ी बातें व्यापारियों की ओर से लगाए गए आरोप/दावे हैं।



