
Gujarat Panchayat: गुजरात के पंचायती राज तंत्र में वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। विधानसभा में पेश पंचायती राज समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1993-94 से 2012-13 के बीच हुए लेखा परीक्षणों में ₹723.81 करोड़ की वसूली लंबित पाई गई थी। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी राशि की वसूली किस व्यक्ति, ठेकेदार या संस्था से की जानी है, इसका स्पष्ट सरकारी रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं है।
20 साल की अवधि में सामने आई करोड़ों की वसूली
पंचायती राज समिति की रिपोर्ट में लंबे समय से लंबित वसूली के मामलों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लेखा परीक्षण में जिन मामलों में सरकारी धन की वसूली की जानी थी, उनमें वर्षों बीतने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि संबंधित रकम किन लोगों, ठेकेदारों या संस्थाओं से वसूल की जानी है, उनकी वर्तमान स्थिति से जुड़ी जानकारी भी विभागीय स्तर पर उपलब्ध नहीं होने की बात रिपोर्ट में सामने आई है।
न रिकॉर्ड, न प्रभावी फॉलो-अप
रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक इन मामलों का उचित हिसाब-किताब और फॉलो-अप नहीं किया गया। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये की वसूली का मामला वर्षों तक लंबित रहा।
समिति ने इस स्थिति को गंभीर प्रशासनिक कमी के तौर पर लिया है। सवाल यह भी उठता है कि जब लेखा परीक्षण के दौरान इतनी बड़ी राशि की वसूली सामने आई थी, तो संबंधित विभागों ने समय रहते जिम्मेदार व्यक्तियों या संस्थाओं से रकम वसूलने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए।
ठेकेदार और संस्थाओं की जानकारी तक स्पष्ट नहीं
मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि जिन ठेकेदारों या संस्थाओं से सरकारी धन की वसूली की जानी थी, वे वर्तमान में अस्तित्व में हैं या नहीं, उनके पास कितनी राशि बकाया है और उनसे वसूली के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई—इन सवालों के जवाब भी स्पष्ट नहीं हैं।
पंचायती राज समिति ने मामले में कड़ी कार्रवाई और लंबित वसूली के मामलों को व्यवस्थित तरीके से निपटाने की सिफारिश की है।
सरकारी धन की वसूली पर उठे गंभीर सवाल
करीब ₹724 करोड़ की वसूली का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं होना पंचायत स्तर पर वित्तीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि सरकार समिति की सिफारिशों पर क्या कार्रवाई करती है और वर्षों से लंबित इस राशि की वास्तविक वसूली के लिए क्या व्यवस्था बनाई जाती है।
नोट: रिपोर्ट में दर्ज ₹723.81 करोड़ की राशि को यहां लंबित/प्रस्तावित वसूली के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसे सीधे तौर पर “घोटाले की राशि” कहना रिपोर्ट के उपलब्ध विवरण से स्वतः सिद्ध नहीं होता।



