250 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति वाले लोगों की संख्या 19,000 के पार, अमीरों का स्टार्टअप में बढ़ा निवेश

India UHNI Investment: भारत के अति-धनी परिवारों (UHNIs) के निवेश का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब तक देश के बेहद अमीर परिवार मुख्य रूप से इक्विटी, फिक्स्ड डिपॉजिट, रियल एस्टेट और पारिवारिक कारोबार में निवेश करते रहे हैं, लेकिन अब वे अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा स्टार्टअप, निजी क्रेडिट और अन्य वैकल्पिक निवेश की ओर बढ़ा रहे हैं।

जूलियस बेयर और EY की 2026 की रिपोर्ट ‘Indian Family Office Playbook: Now, Next and Beyond’ के अनुसार, भारत में कई फैमिली ऑफिस अब अपनी कुल पूंजी का 40 से 45 प्रतिशत तक वैकल्पिक निवेश में लगा रहे हैं।

संपत्ति बचाने से अब संपत्ति बनाने पर जोर

पहले भारतीय फैमिली ऑफिस का प्रमुख उद्देश्य संपत्ति का संरक्षण करना था। इसी वजह से निवेश का बड़ा हिस्सा कम जोखिम वाले निश्चित आय वाले साधनों और रियल एस्टेट में रहता था।

लेकिन देश में अति-धनी लोगों की संख्या बढ़ने के साथ निवेश का नजरिया भी बदल रहा है। अब केवल मौजूदा संपत्ति को सुरक्षित रखने के बजाय नई संपत्ति बनाने और पूंजी को अधिक प्रभावी तरीके से निवेश करने पर जोर दिया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पारंपरिक डेट इंस्ट्रूमेंट्स से मिलने वाला रिटर्न सीमित होने के कारण अति-उच्च नेटवर्थ वाले परिवार नए निवेश विकल्प तलाश रहे हैं।

250 करोड़ से ज्यादा संपत्ति वाले 19 हजार से अधिक लोग

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 3 करोड़ डॉलर यानी करीब 250 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति रखने वाले अति-उच्च नेटवर्थ व्यक्तियों (UHNIs) की संख्या 19,000 से ज्यादा हो चुकी है।

अनुमान है कि 2031 तक यह संख्या 25,000 से अधिक हो सकती है।

स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल में बढ़ी दिलचस्पी

फैमिली ऑफिस अब प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कई फैमिली ऑफिस अपने पोर्टफोलियो का 10 से 20 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सा PE और वेंचर कैपिटल में लगा रहे हैं।

अब वे केवल निवेश फंड के जरिए पैसा लगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्टार्टअप और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में सीधे हिस्सेदारी भी खरीद रहे हैं। इसके अलावा बड़े निवेश फंडों के साथ सह-निवेश का चलन भी बढ़ रहा है।

निजी कर्ज देने वाले निवेश विकल्पों में भी रुचि

फैमिली ऑफिस प्राइवेट क्रेडिट में भी दिलचस्पी बढ़ा रहे हैं। इसमें बैंकिंग व्यवस्था के बाहर कंपनियों या अन्य संस्थाओं को सीधे कर्ज देकर निवेश किया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के वैकल्पिक निवेश बाजार का मौजूदा आकार करीब 400 अरब डॉलर है और 2034 तक इसके 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।

AIF, REIT और InvIT भी निवेश के दायरे में

अमीर परिवारों के निवेश पोर्टफोलियो में अब Alternative Investment Funds (AIFs), Real Estate Investment Trusts (REITs) और Infrastructure Investment Trusts (InvITs) की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है।

इन साधनों के जरिए फैमिली ऑफिस पारंपरिक शेयर और रियल एस्टेट से अलग क्षेत्रों में निवेश के अवसर तलाश रहे हैं।

AI से सेमीकंडक्टर तक, नई थीम पर दांव

अति-धनी परिवार उभरते क्षेत्रों में भी निवेश के अवसर तलाश रहे हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाइमेट टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

युवा पीढ़ी बदल रही है निवेश का तरीका

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे फैमिली ऑफिस में युवा पीढ़ी की बढ़ती भूमिका भी एक महत्वपूर्ण कारण है। भारत के करीब 20 प्रतिशत अमीर लोग 40 वर्ष से कम उम्र के हैं

विदेशों में शिक्षा प्राप्त इस पीढ़ी की रुचि केवल पारिवारिक कारोबार तक सीमित नहीं है। वे टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, मीडिया और क्लाइमेट सॉल्यूशंस जैसे नए क्षेत्रों में भी निवेश के अवसर तलाश रहे हैं।

विदेशों में निवेश से घटाया जा रहा जोखिम

अमीर परिवार अपनी पूरी संपत्ति को एक ही देश में निवेश करने से जुड़े कंसंट्रेशन रिस्क को कम करने के लिए विदेशी बाजारों का भी रुख कर रहे हैं।

वे AI, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसी वैश्विक तकनीकों में निवेश के अवसर तलाश रहे हैं। साथ ही, मजबूत नियामकीय व्यवस्था और बेहतर सिस्टम के जरिए फैमिली ऑफिस अपने निवेश और फंड का अधिक पेशेवर तरीके से प्रबंधन कर रहे हैं।