
त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने हॉलमार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी की है। सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस अब 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये प्रति वस्तु कर दी गई है। यह बढ़ोतरी करीब 67 प्रतिशत है।
ग्राहकों पर क्या होगा असर?
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, हॉलमार्किंग शुल्क सीधे ग्राहकों से लेने का प्रावधान नहीं है। यह शुल्क ज्वेलर्स द्वारा हॉलमार्किंग केंद्रों को भुगतान किया जाता है। इसलिए शुल्क बढ़ने का ग्राहकों पर सीधा असर नहीं पड़ता।
हालांकि, ज्वेलर्स चाहें तो बढ़ी हुई लागत को अपने स्तर पर वहन कर सकते हैं या इसे आभूषण की कीमत, निर्माण शुल्क अथवा अन्य शुल्कों में शामिल कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में अप्रत्यक्ष रूप से इसका असर ग्राहक की कुल खरीद लागत पर पड़ सकता है।
ज्वेलर्स पर बढ़ा अतिरिक्त बोझ
हॉलमार्किंग फीस में बढ़ोतरी के बाद ज्वेलर्स को प्रत्येक सोने की वस्तु के लिए पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा। उदाहरण के तौर पर, 45 रुपये की पुरानी फीस के मुकाबले अब प्रति वस्तु 30 रुपये अधिक देने होंगे।
यह अतिरिक्त लागत ज्वेलर खुद वहन करता है या ग्राहक से वसूलता है, यह उसकी मूल्य निर्धारण व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
BIS को कितनी राशि मिलेगी?
अधिसूचना के अनुसार, हॉलमार्किंग केंद्रों को सोने की प्रत्येक वस्तु पर 7.50 रुपये BIS को देने होंगे। हालांकि, एक खेप (कंसाइनमेंट) पर न्यूनतम भुगतान 20 रुपये निर्धारित है। चांदी की प्रत्येक वस्तु पर BIS को 3.50 रुपये का भुगतान करना होगा और एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम राशि 15 रुपये रहेगी। इन राशियों पर लागू कर अलग से देय होगा।
सोने के कंसाइनमेंट की न्यूनतम फीस में बदलाव नहीं
हॉलमार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी के बावजूद सोने के एक कंसाइनमेंट की न्यूनतम फीस 200 रुपये पर ही बनी हुई है। यानी नए शुल्क के बावजूद एक कंसाइनमेंट के लिए कम से कम 200 रुपये का भुगतान करना होगा।
चांदी की हॉलमार्किंग फीस भी यथावत
नए बदलावों में चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है। चांदी की वस्तुओं के लिए हॉलमार्किंग शुल्क 35 रुपये प्रति वस्तु और कंसाइनमेंट शुल्क 150 रुपये ही रखा गया है।



