UPI MDR विवाद में कांग्रेस के सांसदों की भूमिका पर सवाल: चिदंबरम-मनिष तिवारी समेत 5 सांसदों का रिपोर्ट में था नाम

नई दिल्ली: ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारी UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस व्यवस्था को “UPI टैक्स” बताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है और आरोप लगाया है कि यह कदम अमेरिकी दबाव से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि MDR कोई कर नहीं है और इसका सीधा भुगतान ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा।

इसी बीच भाजपा और सरकार से जुड़े सूत्रों ने वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में UPI व्यवस्था की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए एक चरणबद्ध राजस्व मॉडल की जरूरत बताई गई थी।

चिदंबरम और मनिष तिवारी समेत 5 कांग्रेस सांसद समिति में थे

भाजपा सूत्रों के अनुसार, वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट को अपनाया था। उस समय समिति में कांग्रेस के पांच सांसद—पी. चिदंबरम, मनिष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ—शामिल थे और बैठक में मौजूद थे।

भाजपा ने इसी आधार पर राहुल गांधी के मौजूदा विरोध पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार समिति की सिफारिश चरणबद्ध और टिकाऊ राजस्व व्यवस्था तैयार करने को लेकर थी, न कि प्रत्येक UPI भुगतान पर एक समान शुल्क लगाने की।

समिति ने UPI की वित्तीय स्थिरता पर जताई थी चिंता

संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि UPI पारिस्थितिकी तंत्र को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए एक व्यवहार्य राजस्व व्यवस्था जरूरी है। समिति ने सरकार के खजाने पर लगातार बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करने के लिए स्तरीय राजस्व मॉडल अपनाने की सिफारिश की थी।

समिति ने साथ ही छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान के विस्तार को जारी रखने पर भी जोर दिया था।

नया MDR ढांचा क्या है?

नए ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र व्यापारी UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 निर्धारित की गई है।

यह शुल्क ग्राहक से सीधे लेने के बजाय व्यापारी पक्ष पर लागू होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI भुगतान पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।

सरकार और विपक्ष के दावे अलग-अलग

राहुल गांधी ने नए शुल्क ढांचे को “UPI टैक्स” बताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इससे अंततः ग्राहकों पर आर्थिक बोझ पड़ सकता है और इसे अमेरिकी दबाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं।

वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि MDR कर नहीं है और ग्राहक से सीधे UPI शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार का तर्क है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल भुगतान के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

संसदीय रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक बहस तेज

अब संसदीय समिति की पुरानी सिफारिश और मौजूदा MDR ढांचे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा समिति में शामिल कांग्रेस सांसदों का हवाला देकर राहुल गांधी के विरोध पर सवाल उठा रही है, जबकि कांग्रेस मौजूदा शुल्क व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमला कर रही है।

इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि समिति ने टिकाऊ और चरणबद्ध राजस्व मॉडल की बात कही थी, जबकि मौजूदा व्यवस्था में ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जा रहा है। इसलिए दोनों को पूरी तरह समान मानना उचित नहीं होगा।