
नई दिल्ली: ₹2,000 से अधिक के पात्र UPI लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने की घोषणा के बाद व्यापारियों और उद्योग जगत में बहस तेज हो गई है। दुकानदारों, व्यापारियों, पेट्रोल पंप संचालकों, शेयर कारोबारियों और कंपनियों के एक वर्ग ने इस शुल्क पर चिंता जताई है।
कुछ व्यापारियों का कहना है कि MDR सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, लेकिन इसकी लागत अंततः कीमतों में शामिल की जा सकती है। कुछ व्यापारियों ने यह भी कहा है कि यदि शुल्क का बोझ बढ़ता है तो वे UPI के बजाय नकद लेनदेन को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकते हैं।
व्यापारियों का तर्क: लागत का असर ग्राहकों तक पहुंच सकता है
व्यापारियों के अनुसार, मौजूदा प्रतिस्पर्धी बाजार और सीमित लाभ मार्जिन के बीच अतिरिक्त MDR उनके लिए वित्तीय बोझ बढ़ा सकता है। उनका तर्क है कि भले ही शुल्क सीधे ग्राहकों पर नहीं लगाया गया हो, लेकिन व्यापारी इसे अपने उत्पादों की कीमत, सेवा शुल्क या अन्य कारोबारी लागत में शामिल कर सकते हैं।
कुछ व्यापारियों ने जीएसटी लागू होने के समय का उदाहरण देते हुए कहा कि अप्रत्यक्ष करों का असर कई मामलों में अंततः उपभोक्ता कीमतों में दिखाई देता है। उनका कहना है कि UPI पर MDR लागू होने से भी इसी तरह की स्थिति बन सकती है।
कम मार्जिन वाले कारोबार पर ज्यादा असर की चिंता
एक फार्मा कंपनी के निदेशक राहुल मम्मन ने अपने कारोबार पर संभावित प्रभाव का अनुमान लगाते हुए कहा कि कम लाभ मार्जिन वाले कारोबारों के लिए 0.40 प्रतिशत MDR महत्वपूर्ण लागत बन सकता है।
उनके अनुसार, जिन कारोबारों में लाभ मार्जिन केवल 2 से 3 प्रतिशत है, वहां MDR का प्रभाव कारोबार की कुल लागत पर काफी बड़ा हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी कंपनी पर इस व्यवस्था से सालाना करीब 1.2 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया तो कंपनी UPI के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने को सीमित करने पर विचार कर सकती है।
सरकार ने नकद लेनदेन बढ़ने की आशंका खारिज की
व्यापारियों की आशंकाओं के विपरीत, वित्त मंत्रालय ने कहा है कि नए MDR ढांचे से देश में नकद लेनदेन बढ़ने की आशंका को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है।
सरकार के अनुसार, प्रस्तावित MDR व्यवस्था का असर UPI लेनदेन के करीब 4 प्रतिशत हिस्से पर ही पड़ेगा। इसके अलावा, रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर राशि की कोई सीमा लगाए बिना भुगतान को निःशुल्क रखने की व्यवस्था जारी है।
ग्राहकों पर MDR का बोझ न पड़े, इसके लिए तंत्र बनाने की तैयारी
वित्त मंत्रालय का कहना है कि MDR का सीधा बोझ ग्राहकों पर न पड़े, इसके लिए निगरानी और नियामकीय व्यवस्था तैयार की जाएगी।
मंत्रालय ने UPI से जुड़े ऐप और अन्य संबंधित पक्षों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत शुरू की है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापारी इस शुल्क को सीधे उपभोक्ताओं पर न डालें।
सरकार का यह भी तर्क है कि दुनिया के कई देशों में डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए इस तरह के शुल्क लिए जाते हैं।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने किया MDR का समर्थन
इस बीच, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने UPI पर MDR लागू करने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को बिना किसी राजस्व के अपनी व्यवस्था चलाना संभव नहीं है और मौजूदा शुल्क अपेक्षाकृत मामूली है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 100 रुपये के लेनदेन पर 40 पैसे का शुल्क बनता है। उनके इस बयान के बाद MDR को लेकर राजनीतिक और कारोबारी बहस और तेज हो गई है।
UPI शुल्क को लेकर आगे क्या?
एक तरफ सरकार का कहना है कि MDR सीमित संख्या में बड़े व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा और ग्राहकों पर इसका सीधा बोझ नहीं पड़ेगा। दूसरी तरफ व्यापारियों का एक वर्ग इस लागत को अपने कारोबार के लिए चुनौती मान रहा है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि MDR की लागत वास्तव में व्यापारी वहन करते हैं या इसका कोई हिस्सा उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में शामिल किया जाता है। साथ ही, सरकार द्वारा तैयार किए जाने वाले निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता भी महत्वपूर्ण होगी।



