चावल उत्पादन को लेकर चिंता, इस सीजन में उत्पादन 20 साल के निचले स्तर तक पहुंचने का अनुमान

कम बारिश, घटते बुवाई क्षेत्र और तापमान में उतार-चढ़ाव का असर; सरकार के पास रिकॉर्ड भंडार, इसलिए घरेलू बाजार में कमी की आशंका नहीं

नई दिल्ली: इस खरीफ सीजन में कम बारिश, चावल की बुवाई के क्षेत्र में कमी और तापमान में अचानक बदलाव का असर फसल पर पड़ने की आशंका है। चावल का उत्पादन पिछले करीब 20 वर्षों के निचले स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि, सरकार के पास पर्याप्त बफर स्टॉक होने के कारण घरेलू बाजार में चावल की कमी की स्थिति बनने की संभावना कम है।

उत्पादन में कमी की स्थिति में किसानों को खुले बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कीमतें उत्पादन, मांग और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी।

उत्पादन में करीब 1 करोड़ टन की कमी का अनुमान

चावल व्यापारियों के अनुसार, कटाई के मौसम के दौरान सामान्य से कम बारिश ने उत्पादन को प्रभावित किया है। चावल निर्यातक संगठन के अनुमान के मुताबिक, कम बारिश के कारण इस साल चावल के उत्पादन में करीब 1 करोड़ टन की कमी आ सकती है।

यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो पिछले वर्ष के करीब 154 मिलियन टन के रिकॉर्ड उत्पादन की तुलना में उत्पादन लगभग 6.5 प्रतिशत कम हो सकता है। यह 2009-10 में अल नीनो के कारण आई गिरावट के बाद सबसे बड़ी गिरावट में से एक हो सकती है।

USDA ने भी घटाया उत्पादन अनुमान

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने भी भारत के चावल उत्पादन के अनुमान में कटौती की है।

अगस्त की रिपोर्ट में USDA ने 2026-27 सीजन में भारत का चावल उत्पादन करीब 150 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया था। सितंबर की रिपोर्ट में इसे घटाकर 147 मिलियन टन कर दिया गया।

हालांकि, भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम फसल अनुमान के अनुसार, 2025-26 सीजन में देश का चावल उत्पादन 154 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का अनुमान है।

मानसून में 15% बारिश की कमी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से शुरू हुए मानसून सीजन में अब तक सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

कुछ प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी करीब 42 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर धान की बुवाई और फसल की स्थिति पर पड़ने की आशंका है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 11 सितंबर तक खरीफ धान की बुवाई का क्षेत्र 4.268 करोड़ हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 4 प्रतिशत कम है।

उत्पादन घटने के बावजूद जारी रह सकता है निर्यात

उत्पादन में कमी के बावजूद भारत से चावल का निर्यात जारी रहने की संभावना है। इसका प्रमुख कारण देश में उपलब्ध बड़ा सरकारी भंडार है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर तक भारत के पास करीब 5.96 करोड़ टन चावल का रिकॉर्ड स्टॉक था। यह 1 अक्टूबर के लिए निर्धारित 1.03 करोड़ टन के सरकारी बफर लक्ष्य से काफी अधिक है।

इस बड़े भंडार के कारण घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल किसी बड़े निर्यात प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं होने की संभावना जताई गई है।

USDA के मुताबिक शुरुआती स्टॉक भी बढ़ा

USDA के सितंबर अनुमान के अनुसार, भारत के पास चावल का शुरुआती स्टॉक करीब 5.85 करोड़ टन है। यह अगस्त की रिपोर्ट में लगाए गए 5.40 करोड़ टन के अनुमान से लगभग 45 लाख टन अधिक है।

इस तरह एक ओर कम बारिश और घटती बुवाई के कारण आगामी उत्पादन पर दबाव है, वहीं दूसरी ओर पर्याप्त सरकारी स्टॉक घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।