
Jal Jeevan Mission Gujarat: गुजरात में ग्रामीण परिवारों तक नल से पानी पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। ऑडिट में सरकारी आंकड़ों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर, पानी की गुणवत्ता, परियोजनाओं में देरी और भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं पर सवाल उठाए गए हैं।
100 प्रतिशत नल कनेक्शन के दावे पर सवाल
CAG की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात ने ई-जलगक्ति पोर्टल और राज्य की वार्षिक कार्ययोजना के आधार पर अक्टूबर 2022 तक राज्य के 91.18 लाख ग्रामीण परिवारों को 100 प्रतिशत कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध होने का दावा किया था।
हालांकि, 27 जिलों की जिला वार्षिक कार्ययोजनाओं के आंकड़ों में 1 अप्रैल 2024 तक 14.84 लाख ग्रामीण परिवारों के नल कनेक्शन लंबित बताए गए थे। CAG ने इस विरोधाभास के कारण सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया।
कई घरों में नल कनेक्शन कार्यात्मक नहीं
CAG के प्रदर्शन ऑडिट में छह जिलों के नमूना परीक्षण के दौरान भी जमीनी स्थिति और सरकारी दावों में अंतर सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2024 तक जांच किए गए चार जिलों में 71,842 ग्रामीण परिवारों के घरेलू नल कनेक्शन कार्यात्मक नहीं पाए गए।
ऑडिट में पानी की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं और जलापूर्ति परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी का भी उल्लेख किया गया है।
परियोजनाओं में देरी और 73 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान का मुद्दा
CAG की रिपोर्ट में जल जीवन मिशन के तहत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कई खामियां दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, ठेकेदारों को करीब 73 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान का मामला भी सामने आया है।
ऑडिट में योजना के तहत उपलब्ध आंकड़ों और वास्तविक प्रगति के बीच बेहतर निगरानी और सत्यापन की जरूरत पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पानी की शिकायतों के लिए 1916 हेल्पलाइन
गुजरात के जल आपूर्ति विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल से जुड़ी शिकायतों के लिए 1916 टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू की है। यह सेवा वर्ष 2018 से चौबीसों घंटे उपलब्ध होने की जानकारी सरकार की ओर से दी गई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 तक 1916 हेल्पलाइन के शुरू होने से कुल 2,22,116 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिनमें से 2,21,364 यानी 99.66 प्रतिशत शिकायतों के समाधान का दावा किया गया था।
इसलिए शिकायतों की बड़ी संख्या को सीधे तौर पर “सभी शिकायतें लंबित” या “सरकारी व्यवस्था पूरी तरह विफल” मानना सही नहीं होगा। शिकायतों के पंजीकरण और उनके निपटारे के सरकारी आंकड़े भी अलग से उपलब्ध हैं।
जल जीवन मिशन के सामने अब असली चुनौती
CAG की रिपोर्ट के बाद मुख्य सवाल केवल यह नहीं है कि कितने ग्रामीण घरों तक नल पहुंचा, बल्कि यह भी है कि कितने घरों में नियमित और कार्यात्मक रूप से पर्याप्त पानी पहुंच रहा है।
गुजरात सरकार के आधिकारिक दावों और जमीनी आंकड़ों के बीच सामने आया अंतर इस बात की जरूरत को रेखांकित करता है कि जल जीवन मिशन की प्रगति का आकलन केवल कनेक्शन की संख्या से नहीं, बल्कि उसकी कार्यशीलता, पानी की गुणवत्ता और नियमित आपूर्ति के आधार पर भी किया जाए।



