
मिलावटी दूध पर कार्रवाई: गुजरात में दूध में मिलावट को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राज्य में मिलावटी दूध के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पिछले 6 महीनों में 20 हजार लीटर से अधिक नकली दूध पकड़े जाने का दावा किया गया है। दूध में मिलावट का यह कारोबार लोगों, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
दूध में रसायन, यूरिया और अन्य पदार्थ मिलाने के आरोप
मिलावटी दूध तैयार करने के लिए पानी के साथ विभिन्न सस्ते पदार्थों और रसायनों के इस्तेमाल की बात सामने आती रही है। इसमें यूरिया, डिटर्जेंट, पाम ऑयल और अन्य मिलावटी पदार्थों के इस्तेमाल के आरोप शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित या मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। हालांकि, किसी विशेष बीमारी का जोखिम दूध में मौजूद मिलावट के प्रकार और उसकी मात्रा पर निर्भर करता है।
सख्त कानून के बावजूद जांच व्यवस्था पर सवाल
दूध में मिलावट रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद मिलावट के मामलों में निगरानी, नमूने लेने और जांच की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
मिलावट के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए नियमित नमूना जांच, प्रयोगशाला परीक्षण और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जाती है।
नकली दूध तैयार करने में किन चीजों के इस्तेमाल की बात सामने आती है?
मिलावटी दूध बनाने के मामलों में दूध की वसा और ठोस पदार्थ जैसी विशेषताओं की नकल करने के लिए अलग-अलग सस्ते पदार्थों के इस्तेमाल की बात सामने आती रही है। इनमें पामोलिन या अन्य वनस्पति तेल, पानी और विभिन्न रसायनों का इस्तेमाल किए जाने के आरोप शामिल हैं।
कुछ मामलों में दूध जैसा रंग और रूप देने के लिए डिटर्जेंट या अन्य पदार्थ मिलाने की भी बात सामने आती है। यूरिया, चीनी, ग्लूकोज और कुछ रसायनों के इस्तेमाल के दावे भी मिलावटी दूध से जुड़े मामलों में सामने आते रहे हैं।
ऐसे पदार्थों का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इसकी पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच जरूरी होती है।



