
अगस्त में नौ प्रमुख क्षेत्रों की वृद्धि दर घटकर 4.8 प्रतिशत रही, कोयला, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का उत्पादन नकारात्मक दायरे में
Indian Economy and Middle East War: खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध और तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने के संकेत मिले हैं। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के नौ प्रमुख बुनियादी क्षेत्रों यानी कोर सेक्टर की वृद्धि दर अगस्त में घटकर 4.8 प्रतिशत रह गई। यह पिछले तीन महीनों का सबसे निचला स्तर है। जुलाई में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 5 प्रतिशत रही थी।
अगस्त में लौह अयस्क और कोयले के उत्पादन में कमजोरी का कोर सेक्टर की कुल वृद्धि पर असर पड़ा। इसके अलावा प्राकृतिक गैस, कच्चे तेल और उर्वरक क्षेत्रों में भी संकुचन दर्ज किया गया।
लौह अयस्क और कोयले के उत्पादन में गिरावट
कोर सेक्टर के सूचकांक में लौह अयस्क का भार 4.9 प्रतिशत है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में लौह अयस्क क्षेत्र की वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 29.5 प्रतिशत थी। इसके साथ ही इसका क्षेत्रीय सूचकांक 104.8 से घटकर 96.1 रह गया।
वहीं, सूचकांक में 5.6 प्रतिशत भार रखने वाले कोयला क्षेत्र ने जुलाई में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी, लेकिन अगस्त में इसमें 3.8 प्रतिशत की गिरावट आई। लगातार दो महीनों की वृद्धि के बाद कोयला क्षेत्र अगस्त में नकारात्मक दायरे में चला गया।
पांच क्षेत्रों में रही सकारात्मक वृद्धि
अगस्त में नौ प्रमुख क्षेत्रों में से पांच ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें सीमेंट, बिजली, लौह अयस्क, इस्पात और रिफाइनरी उत्पाद शामिल हैं।
इसके विपरीत कोयला, प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल और उर्वरक क्षेत्रों में संकुचन दर्ज किया गया।
कोर सेक्टर में सबसे अधिक भार बिजली क्षेत्र का है, जो 30.9 प्रतिशत है। अगस्त में बिजली उत्पादन की वृद्धि दर बढ़कर 11.6 प्रतिशत हो गई, जो 27 महीनों का उच्चतम स्तर बताया गया है। जुलाई में बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर 8.4 प्रतिशत थी।
अप्रैल से अगस्त तक 4.3 प्रतिशत की वृद्धि
अप्रैल से अगस्त की अवधि में कोर सेक्टर सूचकांक में करीब 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग दोगुनी है।
इस बार के आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि नई श्रृंखला में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है। इससे पहले की श्रृंखला में आठ क्षेत्र शामिल थे, जबकि नई श्रृंखला में लौह अयस्क को भी शामिल किया गया है।
कमजोर मानसून से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका
कोर सेक्टर के आंकड़ों के साथ मानसून की स्थिति भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के करीब 45 प्रतिशत हिस्से में अभी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।
यदि मानसून के बचे हुए दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो इसका असर कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है। इसका प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मांग पर भी पड़ने की आशंका है। इसके अलावा आगामी त्योहारी सीजन में उपभोक्ता खर्च और दिवाली की खरीदारी पर भी इसका असर पड़ सकता है।
हालांकि, कोर सेक्टर की वृद्धि में कमजोरी को सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था में मंदी का निर्णायक संकेत मानने के बजाय इसे औद्योगिक गतिविधियों के एक महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में देखा जाता है।



