
Iran Strait of Hormuz News: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक संकेत सामने आया है। Reuters और जापान की क्योदो न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि अगर अमेरिका अपनी सैन्य दबाव की नीति में शुरुआती ढील देता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अवरोध को हटाता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को फिर से खोलने के लिए तैयार है।
हालांकि, इसी बीच ईरान की अर्ध-सरकारी Fars News Agency ने क्योदो और Reuters की इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसे गलत बताया है। ऐसे में फिलहाल इसे अंतिम समझौता नहीं, बल्कि रिपोर्टेड ईरानी प्रस्ताव के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका से सैन्य दबाव कम करने की मांग
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका से सैन्य दबाव कम करने को इस प्रस्ताव की प्रमुख शर्तों में शामिल किया है। ईरानी अधिकारी के मुताबिक, यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया जा चुका है।
ईरान का रुख यह है कि यदि अमेरिका तनाव कम करने की दिशा में ठोस शुरुआती कदम उठाता है, तो हॉर्मुज़ को दोबारा खोलने और बातचीत आगे बढ़ाने का रास्ता बनाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान स्थायी रूप से शत्रुता समाप्त करने के लिए बातचीत फिर शुरू करने की मांग भी कर रहा है।
ट्रंप और पेजेश्कियन की मुलाकात पर अभी तस्वीर साफ नहीं
इस घटनाक्रम के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की संभावित मुलाकात को लेकर भी चर्चा है। हालांकि Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेश्कियन की ट्रंप के साथ मुलाकात की फिलहाल कोई योजना नहीं है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए अधिकार दिया गया है और मध्यस्थों के जरिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
हॉर्मुज़ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ ईरान और ओमान के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, 2024 में इस मार्ग से औसतन करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल का प्रवाह हुआ, जो वैश्विक पेट्रोलियम तरल पदार्थों की खपत का लगभग 20% था।
प्राकृतिक गैस के लिहाज से भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। EIA के अनुसार, 2024 में वैश्विक LNG व्यापार का करीब 20% हिस्सा हॉर्मुज़ से होकर गुजरा, जिसमें कतर की बड़ी भूमिका रही।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
हॉर्मुज़ से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजारों पर दबाव कम हो सकता है। 22 सितंबर को ईरान की ओर से हॉर्मुज़ को सात दिनों में खोलने की रिपोर्ट सामने आने के बाद तेल कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई। Reuters के अनुसार, बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आया।
भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए हॉर्मुज़ से होकर होने वाला तेल और LNG परिवहन महत्वपूर्ण है। यदि समुद्री आपूर्ति और व्यापारिक आवाजाही सामान्य होती है, तो इससे ऊर्जा लागत और आपूर्ति संबंधी चिंताओं में राहत मिल सकती है। हालांकि, इसका सीधा असर भारतीय पेट्रोल-डीजल कीमतों पर कितना होगा, यह अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर और घरेलू मूल्य निर्धारण जैसे अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगा।
अब सबकी नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर
ईरान की ओर से सात दिनों में हॉर्मुज़ खोलने की कथित पेशकश और अमेरिका से सैन्य दबाव कम करने की मांग ने कूटनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। लेकिन Fars News Agency की ओर से इस रिपोर्ट के खंडन के कारण घटनाक्रम अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
अब आने वाले दिनों में यह महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत आगे बढ़ती है या नहीं और हॉर्मुज़ में समुद्री आवाजाही को लेकर कोई औपचारिक समझौता सामने आता है या नहीं।



