UNGA के इतर OIC बैठक में पाकिस्तान ने फिर उठाया कश्मीर मुद्दा, इशाक डार ने भारत पर लगाए कई आरोप

न्यूयॉर्क: 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में आयोजित OIC संपर्क समूह की जम्मू-कश्मीर पर मंत्रीस्तरीय बैठक में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने कश्मीर मुद्दा उठाया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, डार ने OIC सदस्य देशों से संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर को लेकर एकजुट रुख अपनाने की अपील की।

पाकिस्तान के आधिकारिक बयान में भारत पर 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर की जनसांख्यिकीय, राजनीतिक और सांस्कृतिक स्थिति बदलने के प्रयासों का आरोप लगाया गया। पाकिस्तान ने इन दावों के आधार पर OIC से भारत के खिलाफ कई मांगें रखने की अपील की। ये आरोप पाकिस्तान का पक्ष हैं; भारत इन दावों को स्वीकार नहीं करता।

अनुच्छेद 370 और 5 अगस्त 2019 का मुद्दा

इशाक डार ने अपने संबोधन में 5 अगस्त 2019 के बाद भारत द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। पाकिस्तान के अनुसार, इन कदमों से जम्मू-कश्मीर की जनसांख्यिकीय, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हुई है।

पाकिस्तान ने नए निवास नियमों, निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव और मतदाता सूची से जुड़े कदमों को भी इसी संदर्भ में उठाया। डार ने OIC सदस्य देशों से इन मुद्दों को संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की अपील की।

राजनीतिक और नागरिक अधिकारों को लेकर पाकिस्तान के आरोप

पाकिस्तान ने अपने बयान में जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक और नागरिक गतिविधियों से जुड़े प्रतिबंधों का भी मुद्दा उठाया। डार ने नेताओं, कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों की हिरासत तथा राजनीतिक गतिविधियों से संबंधित प्रतिबंधों का आरोप लगाया।

पाकिस्तान ने OIC से जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय मीडिया, स्वतंत्र पर्यवेक्षकों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को पहुंच देने की मांग करने को भी कहा।

इन आरोपों को रिपोर्ट करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये पाकिस्तान सरकार द्वारा लगाए गए आरोप और उसका आधिकारिक पक्ष हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

सिंधु जल संधि का भी उठाया मुद्दा

इशाक डार ने अपने संबोधन में सिंधु जल संधि का भी उल्लेख किया। पाकिस्तान के अनुसार, यह एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है और किसी एक देश द्वारा इसे एकतरफा तरीके से निलंबित या समाप्त नहीं किया जा सकता।

डार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन किया जाना चाहिए। पाकिस्तान ने इस मुद्दे को भी कश्मीर विवाद के व्यापक संदर्भ से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया।

OIC से पाकिस्तान की प्रमुख मांगें

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और सरकारी मीडिया के अनुसार, इशाक डार ने OIC सदस्य देशों से मुख्य रूप से ये मांगें रखने को कहा:

  • संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर को लेकर एकजुट रुख अपनाया जाए।
  • 5 अगस्त 2019 के बाद भारत द्वारा उठाए गए कदमों को वापस लेने की मांग की जाए।
  • पाकिस्तान के अनुसार हिरासत में लिए गए राजनीतिक कैदियों और अन्य लोगों की रिहाई की मांग की जाए।
  • कथित जनसांख्यिकीय बदलावों को रोकने की मांग की जाए।
  • OIC के विशेष दूत, तथ्य-जांच मिशन, संयुक्त राष्ट्र की संबंधित संस्थाओं, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को जम्मू-कश्मीर तक पहुंच देने की मांग की जाए।

OIC संपर्क समूह ने भी जारी किया बयान

OIC की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर संपर्क समूह की बैठक में संगठन ने कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार के समर्थन को दोहराया और क्षेत्र की मानवीय, मानवाधिकार तथा सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। OIC ने 2019 के बाद उठाए गए कदमों को वापस लेने की मांग भी दोहराई।

भारत ने OIC के रुख को खारिज किया

इस घटनाक्रम के बाद भारत ने OIC संपर्क समूह के जम्मू-कश्मीर से संबंधित संदर्भों को खारिज किया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि OIC को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।

भारत ने OIC के बयान को “राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रचार” बताते हुए उसके संदर्भों को अस्वीकार किया।

इस तरह, न्यूयॉर्क में हुई OIC बैठक के दौरान पाकिस्तान ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया, जबकि भारत ने OIC के हस्तक्षेप को खारिज करते हुए इसे अपना आंतरिक मामला बताया।