मंदी के चलते रत्न कारीगरों ने हीरा कारोबार से मोड़ा मुंह, गुजरात के डायमंड उद्योग की चमक पड़ी फीकी

Gujarat Diamond Industry: गुजरात के हीरा उद्योग पर वैश्विक आर्थिक संकट और भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर देखने को मिल रहा है। कभी दुनिया भर में हीरा कटिंग और पॉलिशिंग के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाला गुजरात का डायमंड उद्योग इस समय मंदी के दौर से गुजर रहा है। कारोबार में आई सुस्ती के कारण हजारों रत्न कारीगरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। कई कारीगर पारंपरिक काम छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में मजदूरी और वैकल्पिक रोजगार तलाशने को मजबूर हैं।

वैश्विक संकट से अहमदाबाद के हीरा कारोबार को झटका, कई कारखाने बंद

हीरा कारखाना संचालकों के मुताबिक, मौजूदा मंदी के पीछे वैश्विक परिस्थितियां प्रमुख कारण हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध तथा मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने कच्चे हीरों की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण कच्चे हीरों की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव भी कारोबार पर पड़ रहा है।

दूसरी ओर, अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पॉलिश किए गए हीरों की मांग घटने से स्थानीय कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक तरफ कच्चे माल की लागत बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ तैयार हीरों की मांग कमजोर पड़ रही है। इस दोहरे दबाव के कारण हीरा कारोबारियों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस मंदी का सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम स्तर के हीरा कारखानों पर पड़ा है। उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद में पहले 600 से अधिक हीरा कारखाने संचालित होते थे। इनमें से 40 से अधिक कारखाने अब तक स्थायी रूप से बंद हो चुके हैं।

ऑर्डर की कमी और आर्थिक बोझ उठाने में परेशानी के कारण कई कारखाना मालिकों को कारोबार बंद करने या कामकाज के घंटे कम करने का फैसला लेना पड़ा है।

अहमदाबाद में 2 लाख से घटकर करीब सवा लाख रह गए रत्न कारीगर

हीरा उद्योग में आई मंदी का असर केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हजारों श्रमिकों और उनके परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद में पहले 2 लाख से अधिक रत्न कारीगर हीरे तराशने और पॉलिश करने का काम करके अपनी रोजी-रोटी कमाते थे। लेकिन मंदी और रोजगार के अवसरों में कमी के कारण अब इनकी संख्या घटकर करीब सवा लाख रह गई है।

काम की कमी के चलते कई कारीगरों को अपने पारंपरिक पेशे से दूरी बनानी पड़ रही है। कुछ लोग दूसरे क्षेत्रों में मजदूरी कर रहे हैं, जबकि अन्य वैकल्पिक रोजगार की तलाश में हैं।

रत्न कारीगरों के लिए यह स्थिति इसलिए भी मुश्किल है, क्योंकि उनका पारंपरिक कौशल मुख्य रूप से हीरा कटिंग और पॉलिशिंग से जुड़ा है। उद्योग में लंबे समय तक कामकाज प्रभावित रहने पर उनके सामने परिवार का खर्च चलाने और नियमित आय बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है।

हीरा बाजार और कारखानों में 21 दिनों की छुट्टी

गुजरात के हीरा उद्योग में मंदी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस बार हीरा बाजार और कारखानों में आधिकारिक तौर पर 21 दिनों की लंबी छुट्टी घोषित की गई है।

कारोबार में सुस्ती, नए ऑर्डर की कमी और उत्पादन पर बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच यह कदम उद्योग की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है। लंबे समय तक काम बंद रहने या उत्पादन घटने से उन श्रमिकों की आय पर भी असर पड़ सकता है, जो दैनिक या काम के हिसाब से मिलने वाली मजदूरी पर निर्भर हैं।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग में सुधार नहीं होता और कच्चे माल की लागत का दबाव बना रहता है, तो छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए स्थिति संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

गुजरात के हीरा उद्योग के सामने रोजगार बचाने की चुनौती

गुजरात का हीरा उद्योग लंबे समय से कटिंग और पॉलिशिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस उद्योग से बड़ी संख्या में कारीगरों, श्रमिकों और छोटे कारोबारियों की आजीविका जुड़ी हुई है।

ऐसे में वैश्विक बाजार में मांग घटने, कच्चे माल की लागत बढ़ने और कारखानों के बंद होने का असर व्यापक हो सकता है। मौजूदा परिस्थितियों में उद्योग के सामने कारोबार को स्थिर रखने के साथ-साथ कुशल कारीगरों के रोजगार को बचाए रखने की चुनौती भी है।

निष्कर्ष: गुजरात के हीरा उद्योग में मंदी का असर कारोबार, उत्पादन और रोजगार पर दिखाई दे रहा है। अहमदाबाद में कारखानों के बंद होने और रत्न कारीगरों के दूसरे क्षेत्रों में रोजगार तलाशने के दावे इस संकट की गंभीरता को उजागर करते हैं। हालांकि, उद्योग की वर्तमान स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए कारखानों, रोजगार और उत्पादन से जुड़े नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि आवश्यक है।