सीवर सफाई में मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, गुजरात समेत 5 राज्यों के मुख्य सचिवों को कारण बताओ नोटिस

Supreme Court News: देश में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान सफाई कर्मचारियों की लगातार हो रही मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को कारण बताओ (Show Cause) नोटिस जारी किया है।

अदालत ने पूछा है कि उसके आदेशों का पालन नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ स्वतः संज्ञान (Suo Motu) अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

PIL पर सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. बलराम सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया।

अदालत ने याद दिलाया कि—

  • अक्टूबर 2023 में सीवर सफाई के दौरान मौत होने पर मुआवजे की राशि बढ़ाकर 30 लाख रुपये की गई थी।
  • जनवरी 2025 में छह महानगरों में मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला साफ करने की प्रथा) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया था।

इसके बावजूद ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

संसद में पेश आंकड़ों का अदालत ने लिया संज्ञान

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने अदालत को बताया कि कड़े निर्देशों के बावजूद मौतों का सिलसिला नहीं रुका है।

संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार—

  • 2024 में 54 सफाई कर्मचारियों की मौत हुई।
  • 2025 में 46 मौतें दर्ज की गईं।

वर्ष 2024 में—

  • महाराष्ट्र – 17 मौतें
  • राजस्थान – 13 मौतें
  • तमिलनाडु – 12 मौतें

दर्ज की गईं।

‘अब जिम्मेदारी तय होगी’ : सुप्रीम कोर्ट

आंकड़ों पर नाराजगी जताते हुए न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने कहा कि यदि अदालत के आदेशों के बाद भी ऐसी मौतें हो रही हैं तो इसे अब स्वीकार नहीं किया जा सकता।

पीठ ने कहा कि केवल ठेकेदारों पर जिम्मेदारी डालने से काम नहीं चलेगा। अदालत अब यह तय करेगी कि जवाबदेही किसकी है और इस तरह की घटनाओं पर रोक लगनी ही चाहिए।

चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पांचों राज्यों के मुख्य सचिवों को चार सप्ताह के भीतर शपथपत्र (Affidavit) के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।